४. मनोनिवारणसुत्तं
२४. ‘‘यतो यतो मनो निवारये,
न दुक्खमेति नं ततो ततो;
स सब्बतो मनो निवारये,
स सब्बतो दुक्खा पमुच्चति’’.
‘‘न सब्बतो मनो निवारये,
न मनो संयतत्तमागतं;
यतो यतो च पापकं,
ततो ततो मनो निवारये’’ति.
२४. ‘‘यतो यतो मनो निवारये,
न दुक्खमेति नं ततो ततो;
स सब्बतो मनो निवारये,
स सब्बतो दुक्खा पमुच्चति’’.
‘‘न सब्बतो मनो निवारये,
न मनो संयतत्तमागतं;
यतो यतो च पापकं,
ततो ततो मनो निवारये’’ति.