७. तिस्सत्थेरगाथा
१५३. ‘‘बहू सपत्ते लभति, मुण्डो सङ्घाटिपारुतो;
लाभी अन्नस्स पानस्स, वत्थस्स सयनस्स च.
१५४. ‘‘एतमादीनवं ञत्वा, सक्कारेसु महब्भयं;
अप्पलाभो अनवस्सुतो, सतो भिक्खु परिब्बजे’’ति.
… तिस्सो थेरो….
१५३. ‘‘बहू सपत्ते लभति, मुण्डो सङ्घाटिपारुतो;
लाभी अन्नस्स पानस्स, वत्थस्स सयनस्स च.
१५४. ‘‘एतमादीनवं ञत्वा, सक्कारेसु महब्भयं;
अप्पलाभो अनवस्सुतो, सतो भिक्खु परिब्बजे’’ति.
… तिस्सो थेरो….