८. किमिलत्थेरगाथा
१५५. ‘‘पाचीनवंसदायम्हि, सक्यपुत्ता सहायका;
पहायानप्पके भोगे, उञ्छापत्तागते रता.
१५६. ‘‘आरद्धवीरिया पहितत्ता, निच्चं दळ्हपरक्कमा;
रमन्ति धम्मरतिया, हित्वान लोकियं रति’’न्ति.
… किमिलो [किम्बिलो (सी. स्या. पी.)] थेरो….
१५५. ‘‘पाचीनवंसदायम्हि, सक्यपुत्ता सहायका;
पहायानप्पके भोगे, उञ्छापत्तागते रता.
१५६. ‘‘आरद्धवीरिया पहितत्ता, निच्चं दळ्हपरक्कमा;
रमन्ति धम्मरतिया, हित्वान लोकियं रति’’न्ति.
… किमिलो [किम्बिलो (सी. स्या. पी.)] थेरो….