१६७. समिद्धिजातकं (२-२-७)

३३. अभुत्वा भिक्खसि भिक्खु, न हि भुत्वान भिक्खसि;

भुत्वान भिक्खु भिक्खस्सु, मा तं कालो उपच्चगा.

३४. कालं वोहं न जानामि, छन्नो कालो न दिस्सति;

तस्मा अभुत्वा भिक्खामि, मा मं कालो उपच्चगाति.

समिद्धिजातकं सत्तमं.