४२. नीनं
यस्मा एकमेव रूपमुदाहटं, तस्मा रूपारूपानि रूपेरूपानीति भेदो वेदितब्बो, तेन हि बहुवचने [बहुवचनेन (पोत्थके)] पठमादुतियासु ‘अट्ठीनी’ति एकमेव रूपमुदाहटन्ति दस्सेति.
यस्मा एकमेव रूपमुदाहटं, तस्मा रूपारूपानि रूपेरूपानीति भेदो वेदितब्बो, तेन हि बहुवचने [बहुवचनेन (पोत्थके)] पठमादुतियासु ‘अट्ठीनी’ति एकमेव रूपमुदाहटन्ति दस्सेति.