६. समाधिसुत्तवण्णना
७०. छट्ठे पटिप्पस्सम्भनं पटिप्पस्सद्धीति अत्थतो एकन्ति आह ‘‘न पटिप्पस्सद्धिलद्धेनाति किलेसप्पटिप्पस्सद्धिया अलद्धेना’’ति. सुक्कपक्खे सन्तेनातिआदीसु अङ्गसन्तताय आरम्मणसन्तताय सब्बकिलेससन्तताय च सन्तेन, अतप्पनियट्ठेन पणीतेन, किलेसप्पटिप्पस्सद्धिया लद्धत्ता, किलेसप्पटिप्पस्सद्धिभावं वा लद्धत्ता पटिप्पस्सद्धिलद्धेन, पस्सद्धिकिलेसेन वा अरहता लद्धत्ता पटिप्पस्सद्धिलद्धेन, एकोदिभावेन अधिगतत्ता एकोदिभावाधिगतेनाति एवमत्थो दट्ठब्बो.
समाधिसुत्तवण्णना निट्ठिता.