५. बन्धनसुत्तं
६५. ‘‘किंसु सम्बन्धनो लोको, किंसु तस्स विचारणं;
किस्सस्सु विप्पहानेन, सब्बं छिन्दति बन्धन’’न्ति.
‘‘नन्दीसम्बन्धनो लोको, वितक्कस्स विचारणं;
तण्हाय विप्पहानेन, सब्बं छिन्दति बन्धन’’न्ति.
६५. ‘‘किंसु सम्बन्धनो लोको, किंसु तस्स विचारणं;
किस्सस्सु विप्पहानेन, सब्बं छिन्दति बन्धन’’न्ति.
‘‘नन्दीसम्बन्धनो लोको, वितक्कस्स विचारणं;
तण्हाय विप्पहानेन, सब्बं छिन्दति बन्धन’’न्ति.