६३. तक्कपण्डितजातकं
६३. कोधना अकतञ्ञू च, पिसुणा मित्तभेदिका [पिसुणा च विभेदिका (सी. स्या. पी.)];
ब्रह्मचरियं चर भिक्खु, सो सुखं न विहाहसीति [पिहाहिसीति (सी. स्या. पी.), विहायसि (क.)].
तक्कपण्डितजातकं [तक्कजातकं (सी. स्या. पी. अट्ठ.)] ततियं.
६३. कोधना अकतञ्ञू च, पिसुणा मित्तभेदिका [पिसुणा च विभेदिका (सी. स्या. पी.)];
ब्रह्मचरियं चर भिक्खु, सो सुखं न विहाहसीति [पिहाहिसीति (सी. स्या. पी.), विहायसि (क.)].
तक्कपण्डितजातकं [तक्कजातकं (सी. स्या. पी. अट्ठ.)] ततियं.