९. वस्सिकसाटिकसिक्खापदवण्णना
५४२. नवमे – वस्सिकसाटिका अनुञ्ञाता होतीति कत्थ अनुञ्ञाता? चीवरक्खन्धके विसाखावत्थुस्मिं. वुत्तञ्हि तत्थ – ‘‘अनुजानामि, भिक्खवे, वस्सिकसाटिक’’न्ति (महाव. ३५२). सेसमेत्थ उत्तानमेव. छसमुट्ठानं.
वस्सिकसाटिकसिक्खापदं नवमं.
५४२. नवमे – वस्सिकसाटिका अनुञ्ञाता होतीति कत्थ अनुञ्ञाता? चीवरक्खन्धके विसाखावत्थुस्मिं. वुत्तञ्हि तत्थ – ‘‘अनुजानामि, भिक्खवे, वस्सिकसाटिक’’न्ति (महाव. ३५२). सेसमेत्थ उत्तानमेव. छसमुट्ठानं.
वस्सिकसाटिकसिक्खापदं नवमं.