१-७. पटिच्चवारादि

पच्चयचतुक्कं

१५८. परित्तं हेतुं धम्मं पटिच्च परित्तो हेतु धम्मो उप्पज्जति हेतुपच्चया. (१)

महग्गतं हेतुं धम्मं पटिच्च महग्गतो हेतु धम्मो उप्पज्जति हेतुपच्चया. (१)

अप्पमाणं हेतुं धम्मं पटिच्च अप्पमाणो हेतु धम्मो उप्पज्जति हेतुपच्चया. (१) (संखित्तं.)

हेतुया तीणि, आरम्मणे तीणि…पे… अविगते तीणि (संखित्तं).

नअधिपतिया तीणि…पे… नविप्पयुत्ते तीणि (संखित्तं).

(सहजातवारम्पि…पे… सम्पयुत्तवारम्पि पटिच्चवारसदिसं वित्थारेतब्बं.)

हेतुआरम्मणपच्चयादि

१५९. परित्तो हेतु धम्मो परित्तस्स हेतुस्स धम्मस्स हेतुपच्चयेन पच्चयो. (१)

महग्गतो हेतु धम्मो महग्गतस्स हेतुस्स धम्मस्स हेतुपच्चयेन पच्चयो. (१)

अप्पमाणो हेतु धम्मो अप्पमाणस्स हेतुस्स धम्मस्स हेतुपच्चयेन पच्चयो. (१)

परित्तो हेतु धम्मो परित्तस्स हेतुस्स धम्मस्स आरम्मणपच्चयेन पच्चयो. परित्तो हेतु धम्मो महग्गतस्स हेतुस्स धम्मस्स आरम्मणपच्चयेन पच्चयो. (२)

महग्गतो हेतु धम्मो महग्गतस्स हेतुस्स धम्मस्स आरम्मणपच्चयेन पच्चयो. महग्गतो हेतु धम्मो परित्तस्स हेतुस्स धम्मस्स आरम्मणपच्चयेन पच्चयो. (२)

अप्पमाणो हेतु धम्मो परित्तस्स हेतुस्स धम्मस्स आरम्मणपच्चयेन पच्चयो. अप्पमाणो हेतु धम्मो महग्गतस्स हेतुस्स धम्मस्स आरम्मणपच्चयेन पच्चयो. (२)

१६०. परित्तो हेतु धम्मो परित्तस्स हेतुस्स धम्मस्स अधिपतिपच्चयेन पच्चयो. (१)

महग्गतो हेतु धम्मो महग्गतस्स हेतुस्स धम्मस्स अधिपतिपच्चयेन पच्चयो. महग्गतो हेतु धम्मो परित्तस्स हेतुस्स धम्मस्स अधिपतिपच्चयेन पच्चयो. (२)

अप्पमाणो हेतु धम्मो अप्पमाणस्स हेतुस्स धम्मस्स अधिपतिपच्चयेन पच्चयो… द्वे.

परित्तो हेतु धम्मो परित्तस्स हेतुस्स धम्मस्स अनन्तरपच्चयेन पच्चयो. परित्तो हेतु धम्मो महग्गतस्स हेतुस्स धम्मस्स अनन्तरपच्चयेन पच्चयो. परित्तो हेतु धम्मो अप्पमाणस्स हेतुस्स धम्मस्स अनन्तरपच्चयेन पच्चयो. (३)

महग्गतो हेतु धम्मो महग्गतस्स हेतुस्स धम्मस्स अनन्तरपच्चयेन पच्चयो. महग्गतो हेतु धम्मो परित्तस्स हेतुस्स धम्मस्स अनन्तरपच्चयेन पच्चयो. महग्गतो हेतु धम्मो अप्पमाणस्स हेतुस्स धम्मस्स अनन्तरपच्चयेन पच्चयो. (३)

अप्पमाणो हेतु धम्मो अप्पमाणस्स हेतुस्स धम्मस्स अनन्तरपच्चयेन पच्चयो. अप्पमाणो हेतु धम्मो परित्तस्स हेतुस्स धम्मस्स अनन्तरपच्चयेन पच्चयो. अप्पमाणो हेतु धम्मो महग्गतस्स हेतुस्स धम्मस्स अनन्तरपच्चयेन पच्चयो. (३)

परित्तो हेतु धम्मो परित्तस्स हेतुस्स धम्मस्स उपनिस्सयपच्चयेन पच्चयो (संखित्तं).

१६१. हेतुया तीणि, आरम्मणे छ, अधिपतिया पञ्च, अनन्तरे नव, समनन्तरे नव, सहजाते तीणि, अञ्ञमञ्ञे तीणि, निस्सये तीणि, उपनिस्सये नव…पे… अविगते तीणि (संखित्तं).

नहेतुया नव, नआरम्मणे नव (संखित्तं).

हेतुपच्चया नआरम्मणे तीणि (संखित्तं).

नहेतुपच्चया आरम्मणे छ (संखित्तं).

(यथा कुसलत्तिके पञ्हावारं, एवं वित्थारेतब्बं.)

नहेतुपदं