२. सङ्ख्यावारो
२४२. हेतुया नव, आरम्मणे नव (अरूपं सब्बं उद्धरितब्बं. चित्तसमुट्ठानदुकसदिसं.) अधिपतिया नव (महाभूता छसुपि पञ्हेसु कातब्बा, अधिपतिया तीसु नत्थि.) अनन्तरे नव, समनन्तरे नव, सहजाते नव, अञ्ञमञ्ञे नव, निस्सये नव, उपनिस्सये नव, पुरेजाते पञ्च, आसेवने पञ्च, कम्मे नव (सब्बत्थ नव), अविगते नव.