३. पच्चयानुलोमपच्चनीयं

हेतुदुकं

१२४. हेतुपच्चया नआरम्मणे छ, नअधिपतिया छ, नअनन्तरे छ, नसमनन्तरे छ, नअञ्ञमञ्ञे द्वे, नउपनिस्सये छ…पे… नमग्गे छ, नसम्पयुत्ते द्वे, नविप्पयुत्ते द्वे, नोनत्थिया छ, नोविगते छ (एवं गणेतब्बं).

अनुलोमपच्चनीयं.