३. विपत्तिवारो
२४१. अवस्सुता भिक्खुनिया अवस्सुतस्स पुरिसपुग्गलस्स कायसंसग्गं सादियन्तिया आपत्तियो चतुन्नं विपत्तीनं कति विपत्तियो भजन्ति? अवस्सुताय भिक्खुनिया अवस्सुतस्स पुरिसपुग्गलस्स कायसंसग्गं सादियन्तिया आपत्तियो चतुन्नं विपत्तीनं द्वे विपत्तियो भजन्ति – सिया सीलविपत्तिं, सिया आचारविपत्तिं…पे….
दधिं विञ्ञापेत्वा भुञ्जन्तिया आपत्तियो चतुन्नं विपत्तीनं कति विपत्तियो भजन्ति? दधिं विञ्ञापेत्वा भुञ्जन्तिया आपत्तियो चतुन्नं विपत्तीनं एकं विपत्तिं भजन्ति – आचारविपत्तिं.
विपत्तिवारो निट्ठितो ततियो.