४. सङ्गहवारो

२४२. अवस्सुता भिक्खुनिया अवस्सुतस्स पुरिसपुग्गलस्स कायसंसग्गं सादियन्तिया आपत्तियो सत्तन्नं आपत्तिक्खन्धानं कतिहि आपत्तिक्खन्धेहि सङ्गहिता? अवस्सुताय भिक्खुनिया अवस्सुतस्स पुरिसपुग्गलस्स कायसंसग्गं सादियन्तिया आपत्तियो सत्तन्नं आपत्तिक्खन्धानं तीहि आपत्तिक्खन्धेहि सङ्गहिता – सिया पाराजिकापत्तिक्खन्धेन, सिया थुल्लच्चयापत्तिक्खन्धेन, सिया दुक्कटापत्तिक्खन्धेन…पे….

दधिं विञ्ञापेत्वा भुञ्जन्तिया आपत्तियो सत्तन्नं आपत्तिक्खन्धानं कतिहि आपत्तिक्खन्धेहि सङ्गहिता? दधिं विञ्ञापेत्वा भुञ्जन्तिया आपत्तियो सत्तन्नं आपत्तिक्खन्धानं द्वीहि आपत्तिक्खन्धेहि सङ्गहिता – सिया पाटिदेसनीयापत्तिक्खन्धेन, सिया दुक्कटापत्तिक्खन्धेन.

सङ्गहवारो निट्ठितो चतुत्थो.