४. वस्सिकसाटिकसिक्खापदं

६२६. तेन समयेन बुद्धो भगवा सावत्थियं विहरति जेतवने अनाथपिण्डिकस्स आरामे. तेन खो पन समयेन भगवता भिक्खूनं वस्सिकसाटिका अनुञ्ञाता होति. छब्बग्गिया भिक्खू – ‘‘भगवता वस्सिकसाटिका अनुञ्ञाता’’ति, पटिकच्चेव [पटिगच्चेव (सी.)] वस्सिकसाटिकचीवरं परियेसन्ति, पटिकच्चेव कत्वा निवासेन्ति, जिण्णाय वस्सिकसाटिकाय नग्गा कायं ओवस्सापेन्ति. ये ते भिक्खू अप्पिच्छा… ते उज्झायन्ति खिय्यन्ति विपाचेन्ति – ‘‘कथञ्हि नाम छब्बग्गिया भिक्खू पटिकच्चेव वस्सिकसाटिकचीवरं परियेसिस्सन्ति, पटिकच्चेव कत्वा निवासेस्सन्ति, जिण्णाय वस्सिकसाटिकाय नग्गा कायं ओवस्सापेस्सन्ती’’ति! अथ खो ते भिक्खू छब्बग्गिये भिक्खू अनेकपरियायेन विगरहित्वा भगवतो एतमत्थं आरोचेसुं…पे… ‘‘सच्चं किर तुम्हे, भिक्खवे, पटिकच्चेव वस्सिकसाटिकचीवरं परियेसथ? पटिकच्चेव कत्वा निवासेथ? जिण्णाय वस्सिकसाटिकाय नग्गा कायं ओवस्सापेथा’’ति? ‘‘सच्चं, भगवा’’ति. विगरहि बुद्धो भगवा…पे… कथञ्हि नाम तुम्हे मोघपुरिसा, पटिकच्चेव वस्सिकसाटिकचीवरं परियेसिस्सथ, पटिकच्चेव कत्वा निवासेस्सथ, जिण्णाय वस्सिकसाटिकाय नग्गा कायं ओवस्सापेस्सथ! नेतं, मोघपुरिसा, अप्पसन्नानं वा पसादाय…पे… एवञ्च पन, भिक्खवे, इमं सिक्खापदं उद्दिसेय्याथ –

६२७. ‘‘मासो सेसो गिम्हान’न्ति भिक्खुना वस्सिकसाटिकचीवरं परियेसितब्बं; ‘अद्धमासो सेसो गिम्हान’न्ति कत्वा निवासेतब्बं. ‘ओरेन चे मासो सेसो गिम्हान’न्ति वस्सिकसाटिकचीवरं परियेसेय्य, ‘ओरेनद्धमासो सेसो गिम्हान’न्ति कत्वा निवासेय्य, निस्सग्गियं पाचित्तिय’’न्ति.

६२८. ‘मासो सेसो गिम्हान’न्ति भिक्खुना वस्सिकसाटिकचीवरं परियेसितब्बन्ति. ये मनुस्सा पुब्बेपि वस्सिकसाटिकचीवरं देन्ति ते उपसङ्कमित्वा एवमस्सु वचनीया – ‘‘कालो वस्सिकसाटिकाय, समयो वस्सिकसाटिकाय, अञ्ञेपि मनुस्सा वस्सिकसाटिकचीवरं देन्ती’’ति. न वत्तब्बा – ‘‘देथ मे वस्सिकसाटिकचीवरं, आहरथ मे वस्सिकसाटिकचीवरं, परिवत्तेथ मे वस्सिकसाटिकचीवरं, चेतापेथ मे वस्सिकसाटिकचीवर’’न्ति.

‘अद्धमासो सेसो गिम्हान’न्ति कत्वा निवासेतब्बन्ति. अद्धमासे सेसे गिम्हाने कत्वा निवासेतब्बं.

‘ओरेन चे मासो सेसो गिम्हान’न्ति अतिरेकमासे सेस गिम्हाने वस्सिकसाटिकचीवरं परियेसति, निस्सग्गियं पाचित्तियं.

‘ओरेनद्धमासो सेसो गिम्हान’न्ति अतिरेकद्धमासे सेसे गिम्हाने कत्वा निवासेति, निस्सग्गियं होति. निस्सज्जितब्बं सङ्घस्स वा गणस्स वा पुग्गलस्स वा. एवञ्च पन, भिक्खवे, निस्सज्जितब्बं…पे… इदं मे, भन्ते, वस्सिकसाटिकचीवरं अतिरेकमासे सेसे गिम्हाने परियिट्ठं अतिरेकद्धमासे सेसे गिम्हाने कत्वा परिदहितं निस्सग्गियं. इमाहं सङ्घस्स निस्सज्जामीति.…पे… ददेय्याति…पे… ददेय्युन्ति…पे… आयस्मतो दम्मीति.

६२९. अतिरेकमासे सेसे गिम्हाने अतिरेकसञ्ञी वस्सिकसाटिकचीवरं परियेसति, निस्सग्गियं पाचित्तियं. अतिरेकमासे सेसे गिम्हाने वेमतिको वस्सिकसाटिकचीवरं परियेसति, निस्सग्गियं पाचित्तियं. अतिरेकमासे सेसे गिम्हाने ऊनकसञ्ञी वस्सिकसाटिकचीवरं परियेसति, निस्सग्गियं पाचित्तियं.

अतिरेकद्धमासे सेसे गिम्हाने अतिरेकसञ्ञी कत्वा निवासेति, निस्सग्गियं पाचित्तियं. अतिरेकद्धमासे सेसे गिम्हाने वेमतिको कत्वा निवासेति, निस्सग्गियं पाचित्तियं. अतिरेकद्धमासे सेसे गिम्हाने ऊनकसञ्ञी कत्वा निवासेति, निस्सग्गियं पाचित्तियं.

सतिया वस्सिकसाटिकाय नग्गो कायं ओवस्सापेति, आपत्ति दुक्कटस्स. ऊनकमासे सेसे गिम्हाने अतिरेकसञ्ञी, आपत्ति दुक्कटस्स. ऊनकमासे सेसे गिम्हाने वेमतिको, आपत्ति दुक्कटस्स. ऊनकमासे सेसे गिम्हाने ऊनकसञ्ञी, अनापत्ति.

ऊनकद्धमासे सेसे गिम्हाने अतिरेकसञ्ञी, आपत्ति दुक्कटस्स. ऊनकद्धमासे सेसे गिम्हाने वेमतिको, आपत्ति दुक्कटस्स. ऊनकद्धमासे सेसे गिम्हाने ऊनकसञ्ञी, अनापत्ति.

६३०. अनापत्ति ‘मासो सेसो गिम्हान’न्ति वस्सिकसाटिकचीवरं परियेसति, ‘अद्धमासो सेसो गिम्हान’न्ति कत्वा निवासेति, ‘ऊनकमासो सेसो गिम्हान’न्ति वस्सिकसाटिकचीवरं परियेसति, ‘ऊनकद्धमासो सेसो गिम्हान’न्ति कत्वा निवासेति, परियिट्ठाय वस्सिकसाटिकाय वस्सं उक्कड्ढिय्यति, निवत्थाय वस्सिकसाटिकाय वस्सं उक्कड्ढिय्यति, धोवित्वा निक्खिपितब्बं; समये निवासेतब्बं, अच्छिन्नचीवरस्स, नट्ठचीवरस्स, आपदासु, उम्मत्तकस्स, आदिकम्मिकस्साति.

वस्सिकसाटिकसिक्खापदं निट्ठितं चतुत्थं.