६६. आपत्तिया अदस्सने उक्खित्तकवत्थूनि
१३०. तेन खो पन समयेन अञ्ञतरो भिक्खु आपत्तिया अदस्सने उक्खित्तको विब्भमि. सो पुन पच्चागन्त्वा भिक्खू उपसम्पदं याचि. भगवतो एतमत्थं आरोचेसुं.
इध पन, भिक्खवे, भिक्खु आपत्तिया अदस्सने उक्खित्तको विब्भमति. सो पुन पच्चागन्त्वा भिक्खू उपसम्पदं याचति. सो एवमस्स वचनीयो – ‘‘पस्सिस्ससि तं आपत्ति’’न्ति? सचाहं पस्सिस्सामीति, पब्बाजेतब्बो. सचाहं न पस्सिस्सामीति, न पब्बाजेतब्बो. पब्बाजेत्वा वत्तब्बो – ‘‘पस्सिस्ससि तं आपत्ति’’न्ति? सचाहं पस्सिस्सामीति, उपसम्पादेतब्बो. सचाहं न पस्सिस्सामीति, न उपसम्पादेतब्बो. उपसम्पादेत्वा वत्तब्बो – ‘‘पस्सिस्ससि तं आपत्ति’’न्ति? सचाहं पस्सिस्सामीति, ओसारेतब्बो. सचाहं न पस्सिस्सामीति, न ओसारेतब्बो. ओसारेत्वा वत्तब्बो – ‘‘पस्ससि [पस्साहि (सी.)] तं आपत्ति’’न्ति? सचे पस्सति, इच्चेतं कुसलं. नो चे पस्सति, लब्भमानाय सामग्गिया पुन उक्खिपितब्बो. अलब्भमानाय सामग्गिया अनापत्ति सम्भोगे संवासे.
इध पन, भिक्खवे, भिक्खु आपत्तिया अप्पटिकम्मे उक्खित्तको विब्भमति. सो पुन पच्चागन्त्वा भिक्खू उपसम्पदं याचति. सो एवमस्स वचनीयो – ‘‘पटिकरिस्ससि तं आपत्ति’’न्ति? सचाहं पटिकरिस्सामीति, पब्बाजेतब्बो. सचाहं न पटिकरिस्सामीति, न पब्बाजेतब्बो. पब्बाजेत्वा वत्तब्बो – ‘‘पटिकरिस्ससि तं आपत्ति’’न्ति? सचाहं पटिकरिस्सामीति, उपसम्पादेतब्बो. सचाहं न पटिकरिस्सामीति, न उपसम्पादेतब्बो. उपसम्पादेत्वा वत्तब्बो – ‘‘पटिकरिस्ससि तं आपत्ति’’न्ति? सचाहं पटिकरिस्सामीति, ओसारेतब्बो. सचाहं न पटिकरिस्सामीति, न ओसारेतब्बो. ओसारेत्वा वत्तब्बो – ‘‘पटिकरोहि तं आपत्ति’’न्ति. सचे पटिकरोति, इच्चेतं कुसलं. नो चे पटिकरोति लब्भमानाय सामग्गिया पुन उक्खिपितब्बो. अलब्भमानाय सामग्गिया अनापत्ति सम्भोगे संवासे.
इध पन, भिक्खवे, भिक्खु पापिकाय दिट्ठिया अप्पटिनिस्सग्गे उक्खित्तको विब्भमति. सो पुन पच्चागन्त्वा भिक्खू उपसम्पदं याचति. सो एवमस्स वचनीयो – ‘‘पटिनिस्सज्जिस्ससि तं पापिकं दिट्ठि’’न्ति? सचाहं पटिनिस्सज्जिस्सामीति, पब्बाजेतब्बो. सचाहं न पटिनिस्सज्जिस्सामीति, न पब्बाजेतब्बो. पब्बाजेत्वा वत्तब्बो – ‘‘पटिनिस्सज्जिस्ससि तं पापिकं दिट्ठि’’न्ति? सचाहं पटिनिस्सज्जिस्सामीति, उपसम्पादेतब्बो. सचाहं न पटिनिस्सज्जिस्सामीति, न उपसम्पादेतब्बो. उपसम्पादेत्वा वत्तब्बो – ‘‘पटिनिस्सज्जिस्ससि तं पापिकं दिट्ठि’’न्ति? सचाहं पटिनिस्सज्जिस्सामीति, ओसारेतब्बो. सचाहं न पटिनिस्सज्जिस्सामीति, न ओसारेतब्बो. ओसारेत्वा वत्तब्बो – ‘‘पटिनिस्सज्जेहि तं पापिकं दिट्ठि’’न्ति. सचे पटिनिस्सज्जति, इच्चेतं कुसलं. नो चे पटिनिस्सज्जति, लब्भमानाय सामग्गिया पुन उक्खिपितब्बो. अलब्भमानाय सामग्गिया अनापत्ति सम्भोगे संवासेति.
महाखन्धको पठमो.