५. मानत्तसतकं
१६६. ‘‘इध पन, भिक्खवे, भिक्खु सम्बहुला सङ्घादिसेसा आपत्तियो आपज्जित्वा अप्पटिच्छादेत्वा विब्भमति. सो पुन [सो चे पुन (क.)] उपसम्पन्नो ता आपत्तियो नच्छादेति. तस्स, भिक्खवे, भिक्खुनो मानत्तं दातब्बं.
‘‘इध पन, भिक्खवे, भिक्खु सम्बहुला सङ्घादिसेसा आपत्तियो आपज्जित्वा अप्पटिच्छादेत्वा विब्भमति. सो पुन उपसम्पन्नो ता आपत्तियो छादेति. तस्स, भिक्खवे, भिक्खुनो पच्छिमस्मिं आपत्तिक्खन्धे यथापटिच्छन्ने परिवासं दत्वा मानत्तं दातब्बं.
‘‘इध पन, भिक्खवे, भिक्खु सम्बहुला सङ्घादिसेसा आपत्तियो आपज्जित्वा पटिच्छादेत्वा विब्भमति. सो पुन उपसम्पन्नो ता आपत्तियो नच्छादेति. तस्स, भिक्खवे, भिक्खुनो पुरिमस्मिं आपत्तिक्खन्धे यथापटिच्छन्ने परिवासं दत्वा मानत्तं दातब्बं.
‘‘इध पन, भिक्खवे, भिक्खु सम्बहुला सङ्घादिसेसा आपत्तियो आपज्जित्वा पटिच्छादेत्वा विब्भमति. सो पुन उपसम्पन्नो ता आपत्तियो छादेति. तस्स, भिक्खवे, भिक्खुनो पुरिमस्मिञ्च पच्छिमस्मिञ्च आपत्तिक्खन्धे यथापटिच्छन्ने परिवासं दत्वा मानत्तं दातब्बं.
१६७. ‘‘इध पन, भिक्खवे, भिक्खु सम्बहुला सङ्घादिसेसा आपत्तियो आपज्जति. तस्स होन्ति आपत्तियो पटिच्छन्नायोपि अप्पटिच्छन्नायोपि. सो विब्भमित्वा पुन उपसम्पन्नो या आपत्तियो पुब्बे छादेसि ता आपत्तियो पच्छा नच्छादेति; या आपत्तियो पुब्बे नच्छादेसि ता आपत्तियो पच्छा नच्छादेति. तस्स, भिक्खवे, भिक्खुनो पुरिमस्मिं आपत्तिक्खन्धे यथापटिच्छन्ने परिवासं दत्वा मानत्तं दातब्बं.
‘‘इध पन, भिक्खवे, भिक्खु सम्बहुला सङ्घादिसेसा आपत्तियो आपज्जति. तस्स होन्ति आपत्तियो पटिच्छन्नायोपि अप्पटिच्छन्नायोपि. सो विब्भमित्वा पुन उपसम्पन्नो या आपत्तियो पुब्बे छादेसि ता आपत्तियो पच्छा नच्छादेति; या आपत्तियो पुब्बे नच्छादेसि ता आपत्तियो पच्छा छादेति. तस्स, भिक्खवे, भिक्खुनो पुरिमस्मिञ्च पच्छिमस्मिञ्च आपत्तिक्खन्धे यथापटिच्छन्ने परिवासं दत्वा मानत्तं दातब्बं.
‘‘इध पन, भिक्खवे, भिक्खु सम्बहुला सङ्घादिसेसा आपत्तियो आपज्जति. तस्स होन्ति आपत्तियो पटिच्छन्नायोपि अप्पटिच्छन्नायोपि. सो विब्भमित्वा पुन उपसम्पन्नो या आपत्तियो पुब्बे छादेसि ता आपत्तियो पच्छा छादेति; या आपत्तियो पुब्बे नच्छादेसि ता आपत्तियो पच्छा नच्छादेति. तस्स, भिक्खवे, भिक्खुनो पुरिमस्मिञ्च पच्छिमस्मिञ्च आपत्तिक्खन्धे यथापटिच्छन्ने परिवासं दत्वा मानत्तं दातब्बं.
‘‘इध पन, भिक्खवे, भिक्खु सम्बहुला सङ्घादिसेसा आपत्तियो आपज्जति. तस्स होन्ति आपत्तियो पटिच्छन्नायोपि अप्पटिच्छन्नायोपि. सो विब्भमित्वा पुन उपसम्पन्नो या आपत्तियो पुब्बे छादेसि ता आपत्तियो पच्छा छादेति; या आपत्तियो पुब्बे नच्छादेसि ता आपत्तियो पच्छा छादेति. तस्स, भिक्खवे, भिक्खुनो पुरिमस्मिञ्च पच्छिमस्मिञ्च आपत्तिक्खन्धे यथापटिच्छन्ने परिवासं दत्वा मानत्तं दातब्बं.
१६८. ‘‘इध पन, भिक्खवे, भिक्खु सम्बहुला सङ्घादिसेसा आपत्तियो आपज्जति. एकच्चा आपत्तियो जानाति, एकच्चा आपत्तियो न जानाति. या आपत्तियो जानाति ता आपत्तियो छादेति. या आपत्तियो न जानाति ता आपत्तियो नच्छादेति. सो विब्भमित्वा पुन उपसम्पन्नो या आपत्तियो पुब्बे जानित्वा छादेसि ता आपत्तियो पच्छा जानित्वा नच्छादेति; या आपत्तियो पुब्बे अजानित्वा नच्छादेसि ता आपत्तियो पच्छा जानित्वा नच्छादेति. तस्स, भिक्खवे, भिक्खुनो पुरिमस्मिं आपत्तिक्खन्धे यथापटिच्छन्ने परिवासं दत्वा मानत्तं दातब्बं.
‘‘इध पन, भिक्खवे, भिक्खु सम्बहुला सङ्घादिसेसा आपत्तियो आपज्जति. एकच्चा आपत्तियो जानाति, एकच्चा आपत्तियो न जानाति. या आपत्तियो जानाति ता आपत्तियो छादेति. या आपत्तियो न जानाति ता आपत्तियो नच्छादेति. सो विब्भमित्वा पुन उपसम्पन्नो या आपत्तियो पुब्बे जानित्वा छादेसि ता आपत्तियो पच्छा जानित्वा नच्छादेति; या आपत्तियो पुब्बे अजानित्वा नच्छादेसि ता आपत्तियो पच्छा जानित्वा छादेति. तस्स, भिक्खवे, भिक्खुनो पुरिमस्मिञ्च पच्छिमस्मिञ्च आपत्तिक्खन्धे यथापटिच्छन्ने परिवासं दत्वा मानत्तं दातब्बं.
‘‘इध पन, भिक्खवे, भिक्खु सम्बहुला सङ्घादिसेसा आपत्तियो आपज्जति. एकच्चा आपत्तियो जानाति, एकच्चा आपत्तियो न जानाति. या आपत्तियो जानाति ता आपत्तियो छादेति. या आपत्तियो न जानाति ता आपत्तियो नच्छादेति. सो विब्भमित्वा पुन उपसम्पन्नो या आपत्तियो पुब्बे जानित्वा छादेसि ता आपत्तियो पच्छा जानित्वा छादेति; या आपत्तियो पुब्बे अजानित्वा नच्छादेसि ता आपत्तियो पच्छा जानित्वा नच्छादेति. तस्स, भिक्खवे, भिक्खुनो पुरिमस्मिञ्च पच्छिमस्मिञ्च आपत्तिक्खन्धे यथापटिच्छन्ने परिवासं दत्वा मानत्तं दातब्बं.
‘‘इध पन, भिक्खवे, भिक्खु सम्बहुला सङ्घादिसेसा आपत्तियो आपज्जति. एकच्चा आपत्तियो जानाति, एकच्चा आपत्तियो न जानाति. या आपत्तियो जानाति ता आपत्तियो छादेति; या आपत्तियो न जानाति ता आपत्तियो नच्छादेति. सो विब्भमित्वा पुन उपसम्पन्नो या आपत्तियो पुब्बे जानित्वा छादेसि ता आपत्तियो पच्छा जानित्वा छादेति; या आपत्तियो पुब्बे अजानित्वा नच्छादेसि ता आपत्तियो पच्छा जानित्वा छादेति. तस्स, भिक्खवे, भिक्खुनो पुरिमस्मिञ्च पच्छिमस्मिञ्च आपत्तिक्खन्धे यथापटिच्छन्ने परिवासं दत्वा मानत्तं दातब्बं.
१६९. ‘‘इध पन, भिक्खवे, भिक्खु सम्बहुला सङ्घादिसेसा आपत्तियो आपज्जति. एकच्चा आपत्तियो सरति, एकच्चा आपत्तियो नस्सरति. या आपत्तियो सरति ता आपत्तियो छादेति; या आपत्तियो नस्सरति ता आपत्तियो नच्छादेति. सो विब्भमित्वा पुन उपसम्पन्नो या आपत्तियो पुब्बे सरित्वा छादेसि ता आपत्तियो पच्छा सरित्वा नच्छादेति; या आपत्तियो पुब्बे अस्सरित्वा नच्छादेसि ता आपत्तियो पच्छा सरित्वा नच्छादेति. तस्स, भिक्खवे, भिक्खुनो पुरिमस्मिं आपत्तिक्खन्धे यथापटिच्छन्ने परिवासं दत्वा मानत्तं दातब्बं.
‘‘इध पन, भिक्खवे, भिक्खु सम्बहुला सङ्घादिसेसा आपत्तियो आपज्जति. एकच्चा आपत्तियो सरति, एकच्चा आपत्तियो नस्सरति. या आपत्तियो सरति ता आपत्तियो छादेति; या आपत्तियो नस्सरति ता आपत्तियो नच्छादेति. सो विब्भमित्वा पुन उपसम्पन्नो या आपत्तियो पुब्बे सरित्वा छादेसि ता आपत्तियो पच्छा सरित्वा नच्छादेति; या आपत्तियो पुब्बे अस्सरित्वा नच्छादेसि ता आपत्तियो पच्छा सरित्वा छादेति. तस्स, भिक्खवे, भिक्खुनो पुरिमस्मिञ्च पच्छिमस्मिञ्च आपत्तिक्खन्धे यथापटिच्छन्ने परिवासं दत्वा मानत्तं दातब्बं.
‘‘इध पन, भिक्खवे, भिक्खु सम्बहुला सङ्घादिसेसा आपत्तियो आपज्जति. एकच्चा आपत्तियो सरति, एकच्चा आपत्तियो नस्सरति. या आपत्तियो सरति ता आपत्तियो छादेति; या आपत्तियो नस्सरति ता आपत्तियो नच्छादेति. सो विब्भमित्वा पुन उपसम्पन्नो या आपत्तियो पुब्बे सरित्वा छादेसि ता आपत्तियो पच्छा सरित्वा छादेति; या आपत्तियो पुब्बे अस्सरित्वा नच्छादेसि ता आपत्तियो पच्छा सरित्वा नच्छादेति. तस्स, भिक्खवे, भिक्खुनो पुरिमस्मिञ्च पच्छिमस्मिञ्च आपत्तिक्खन्धे यथापटिच्छन्ने परिवासं दत्वा मानत्तं दातब्बं.
‘‘इध पन, भिक्खवे, भिक्खु सम्बहुला सङ्घादिसेसा आपत्तियो आपज्जति. एकच्चा आपत्तियो सरति, एकच्चा आपत्तियो नस्सरति. या आपत्तियो सरति ता आपत्तियो छादेति; या आपत्तियो नस्सरति ता आपत्तियो नच्छादेति. सो विब्भमित्वा पुन उपसम्पन्नो या आपत्तियो पुब्बे सरित्वा छादेसि ता आपत्तियो पच्छा सरित्वा छादेति; या आपत्तियो पुब्बे अस्सरित्वा नच्छादेसि ता आपत्तियो पच्छा सरित्वा छादेति. तस्स, भिक्खवे, भिक्खुनो पुरिमस्मिञ्च पच्छिमस्मिञ्च आपत्तिक्खन्धे यथापटिच्छन्ने परिवासं दत्वा मानत्तं दातब्बं.
१७०. ‘‘इध पन, भिक्खवे, भिक्खु सम्बहुला सङ्घादिसेसा आपत्तियो आपज्जति. एकच्चासु आपत्तीसु निब्बेमतिको, एकच्चासु आपत्तीसु वेमतिको. यासु आपत्तीसु निब्बेमतिको ता आपत्तियो छादेति; यासु आपत्तीसु वेमतिको ता आपत्तियो नच्छादेति. सो विब्भमित्वा पुन उपसम्पन्नो या आपत्तियो पुब्बे निब्बेमतिको छादेसि ता आपत्तियो पच्छा निब्बेमतिको नच्छादेति; या आपत्तियो पुब्बे वेमतिको नच्छादेसि ता आपत्तियो पच्छा निब्बेमतिको नच्छादेति. तस्स, भिक्खवे, भिक्खुनो पुरिमस्मिं आपत्तिक्खन्धे यथापटिच्छन्ने परिवासं दत्वा मानत्तं दातब्बं.
‘‘इध पन, भिक्खवे, भिक्खु सम्बहुला सङ्घादिसेसा आपत्तियो आपज्जति. एकच्चासु आपत्तीसु निब्बेमतिको, एकच्चासु आपत्तीसु वेमतिको. यासु आपत्तीसु निब्बेमतिको ता आपत्तियो छादेति; यासु आपत्तीसु वेमतिको ता आपत्तियो नच्छादेति. सो विब्भमित्वा पुन उपसम्पन्नो या आपत्तियो पुब्बे निब्बेमतिको छादेसि ता आपत्तियो पच्छा निब्बेमतिको नच्छादेति; या आपत्तियो पुब्बे वेमतिको नच्छादेसि ता आपत्तियो पच्छा निब्बेमतिको छादेति. तस्स, भिक्खवे, भिक्खुनो पुरिमस्मिञ्च पच्छिमस्मिञ्च आपत्तिक्खन्धे यथापटिच्छन्ने परिवासं दत्वा मानत्तं दातब्बं.
‘‘इध पन, भिक्खवे, भिक्खु सम्बहुला सङ्घादिसेसा आपत्तियो आपज्जति. एकच्चासु आपत्तीसु निब्बेमतिको, एकच्चासु आपत्तीसु वेमतिको. यासु आपत्तीसु निब्बेमतिको ता आपत्तियो छादेति; यासु आपत्तीसु वेमतिको ता आपत्तियो नच्छादेति. सो विब्भमित्वा पुन उपसम्पन्नो या आपत्तियो पुब्बे निब्बेमतिको छादेसि ता आपत्तियो पच्छा निब्बेमतिको छादेति; या आपत्तियो पुब्बे वेमतिको नच्छादेसि ता आपत्तियो पच्छा निब्बेमतिको नच्छादेति. तस्स, भिक्खवे, भिक्खुनो पुरिमस्मिञ्च पच्छिमस्मिञ्च आपत्तिक्खन्धे यथापटिच्छन्ने परिवासं दत्वा मानत्तं दातब्बं.
‘‘इध पन, भिक्खवे, भिक्खु सम्बहुला सङ्घादिसेसा आपत्तियो आपज्जति. एकच्चासु आपत्तीसु निब्बेमतिको, एकच्चासु आपत्तीसु वेमतिको. यासु आपत्तीसु निब्बेमतिको ता आपत्तियो छादेति; यासु आपत्तीसु वेमतिको ता आपत्तियो नच्छादेति. सो विब्भमित्वा पुन उपसम्पन्नो या आपत्तियो पुब्बे निब्बेमतिको छादेसि ता आपत्तियो पच्छा निब्बेमतिको छादेति; या आपत्तियो पुब्बे वेमतिको नच्छादेसि ता आपत्तियो पच्छा निब्बेमतिको छादेति. तस्स, भिक्खवे, भिक्खुनो पुरिमस्मिञ्च पच्छिमस्मिञ्च आपत्तिक्खन्धे यथापटिच्छन्ने परिवासं दत्वा मानत्तं दातब्बं.
१७१. ‘‘इध पन, भिक्खवे, भिक्खु सम्बहुला सङ्घादिसेसा आपत्तियो आपज्जित्वा अप्पटिच्छादेत्वा सामणेरो होति…पे… उम्मत्तको होति…पे… खित्तचित्तो होति…पे… (यथा हेट्ठा तथा वित्थारेतब्बं) वेदनाट्टो होति…पे… तस्स होन्ति आपत्तियो पटिच्छन्नायोपि अप्पटिच्छन्नायोपि…पे… एकच्चा आपत्तियो जानाति, एकच्चा आपत्तियो न जानाति…पे… एकच्चा आपत्तियो सरति, एकच्चा आपत्तियो नस्सरति…पे… एकच्चासु आपत्तीसु निब्बेमतिको, एकच्चासु आपत्तीसु वेमतिको. यासु आपत्तीसु निब्बेमतिको ता आपत्तियो छादेति; यासु आपत्तीसु वेमतिको ता आपत्तियो नच्छादेति. सो वेदनाट्टो होति. सो पुन अवेदनाट्टो हुत्वा या आपत्तियो पुब्बे निब्बेमतिको छादेसि ता आपत्तियो पच्छा निब्बेमतिको नच्छादेति; या आपत्तियो पुब्बे वेमतिको नच्छादेसि ता आपत्तियो पच्छा निब्बेमतिको नच्छादेति…पे… या आपत्तियो पुब्बे निब्बेमतिको छादेसि ता आपत्तियो पच्छा निब्बेमतिको नच्छादेति; या आपत्तियो पुब्बे वेमतिको नच्छादेसि ता आपत्तियो पच्छा निब्बेमतिको छादेति…पे… या आपत्तियो पुब्बे निब्बेमतिको छादेसि ता आपत्तियो पच्छा निब्बेमतिको छादेति; या आपत्तियो पुब्बे वेमतिको नच्छादेसि ता आपत्तियो पच्छा निब्बेमतिको नच्छादेति…पे… या आपत्तियो पुब्बे निब्बेमतिको छादेसि ता आपत्तियो पच्छा निब्बेमतिको छादेति; या आपत्तियो पुब्बे वेमतिको नच्छादेसि ता आपत्तियो पच्छा निब्बेमतिको छादेति. तस्स, भिक्खवे, भिक्खुनो पुरिमस्मिञ्च पच्छिमस्मिञ्च आपत्तिक्खन्धे यथापटिच्छन्ने परिवासं दत्वा मानत्तं दातब्बं.
मानत्तसतं निट्ठितं.