९. अहिरिकमूलकसुत्तं
१०३. सावत्थियं विहरति…पे… ‘‘धातुसोव…पे… अहिरिका अहिरिकेहि सद्धिं संसन्दन्ति समेन्ति, अनोत्तप्पिनो अनोत्तप्पीहि सद्धिं संसन्दन्ति समेन्ति, दुप्पञ्ञा दुप्पञ्ञेहि सद्धिं संसन्दन्ति समेन्ति; हिरिमना हिरिमनेहि सद्धिं ससन्दन्ति समेन्ति, ओत्तप्पिनो ओत्तप्पीहि सद्धिं संसन्दन्ति समेन्ति, पञ्ञवन्तो पञ्ञवन्तेहि सद्धिं संसन्दन्ति समेन्ति…पे…. (१)
‘‘अहिरिका अहिरिकेहि सद्धिं संसन्दन्ति समेन्ति, अप्पस्सुता अप्पस्सुतेहि सद्धिं संसन्दन्ति समेन्ति, दुप्पञ्ञा दुप्पञ्ञेहि सद्धिं संसन्दन्ति समेन्ति; हिरिमना हिरिमनेहि सद्धिं संसन्दन्ति समेन्ति, बहुस्सुता बहुस्सुतेहि सद्धिं संसन्दन्ति समेन्ति, पञ्ञवन्तो पञ्ञवन्तेहि सद्धिं संसन्दन्ति समेन्ति…पे…. (२)
‘‘अहिरिका अहिरिकेहि सद्धिं संसन्दन्ति समेन्ति, कुसीता कुसीतेहि सद्धिं संसन्दन्ति समेन्ति, दुप्पञ्ञा दुप्पञ्ञेहि सद्धिं संसन्दन्ति समेन्ति; हिरिमना हिरिमनेहि सद्धिं संसन्दन्ति समेन्ति, आरद्धवीरिया आरद्धवीरियेहि सद्धिं संसन्दन्ति समेन्ति, पञ्ञवन्तो पञ्ञवन्तेहि सद्धिं संसन्दन्ति समेन्ति…पे…. (३)
‘‘अहिरिका अहिरिकेहि सद्धिं संसन्दन्ति समेन्ति, मुट्ठस्सतिनो मुट्ठस्सतीहि सद्धिं संसन्दन्ति समेन्ति, दुप्पञ्ञा दुप्पञ्ञेहि सद्धिं संसन्दन्ति समेन्ति; हिरिमना हिरिमनेहि सद्धिं संसन्दन्ति समेन्ति, उपट्ठितस्सतिनो उपट्ठितस्सतीहि सद्धिं संसन्दन्ति समेन्ति, पञ्ञवन्तो पञ्ञवन्तेहि सद्धिं संसन्दन्ति समेन्तीति…पे…. नवमं. (४)