४. सत्तबोधिसत्तवारो
३३. ‘‘‘समुदयो समुदयो’ति खो, भिक्खवे, विपस्सिस्स बोधिसत्तस्स पुब्बे अननुस्सुतेसु धम्मेसु चक्खुं उदपादि…पे… आलोको उदपादि. ‘निरोधो निरोधो’ति खो, भिक्खवे, विपस्सिस्स बोधिसत्तस्स पुब्बे अननुस्सुतेसु धम्मेसु चक्खुं उदपादि…पे… आलोको उदपादि’’. विपस्सिस्स बोधिसत्तस्स वेय्याकरणे दस धम्मा, दस अत्था, वीसति निरुत्तियो, चत्तालीसं [चत्तालीस (क.)] ञाणानि.
‘‘‘समुदयो समुदयो’ति खो, भिक्खवे, सिखिस्स बोधिसत्तस्स…पे… वेस्सभुस्स बोधिसत्तस्स…पे… ककुसन्धस्स बोधिसत्तस्स…पे… कोणागमनस्स बोधिसत्तस्स…पे… कस्सपस्स बोधिसत्तस्स पुब्बे अननुस्सुतेसु धम्मेसु चक्खुं उदपादि…पे… आलोको उदपादि. ‘निरोधो निरोधो’ति खो, भिक्खवे, कस्सपस्स बोधिसत्तस्स पुब्बे अननुस्सुतेसु धम्मेसु चक्खुं उदपादि…पे… आलोको उदपादि’’. कस्सपस्स बोधिसत्तस्स वेय्याकरणे दस धम्मा, दस अत्था, वीसति निरुत्तियो, चत्तालीस ञाणानि.
‘‘‘समुदयो समुदयो’ति खो, भिक्खवे, गोतमस्स बोधिसत्तस्स पुब्बे अननुस्सुतेसु धम्मेसु चक्खुं उदपादि…पे… आलोको उदपादि. ‘निरोधो निरोधो’ति खो, भिक्खवे, गोतमस्स बोधिसत्तस्स पुब्बे अननुस्सुतेसु धम्मेसु चक्खुं उदपादि…पे… आलोको उदपादि’’. गोतमस्स बोधिसत्तस्स वेय्याकरणे दस धम्मा, दस अत्था, वीसति निरुत्तियो, चत्तालीस ञाणानि.
सत्तन्नं बोधिसत्तानं सत्तसु वेय्याकरणेसु सत्तति धम्मा, सत्तति अत्था, चत्तालीससतं [चत्तारीससता (स्या.)] निरुत्तियो, असीति च द्वे च ञाणसतानि.