५६-६३. सच्चञाणचतुक्कद्वयनिद्देसो

१०८. कथं परिञ्ञट्ठे पञ्ञा दुक्खे ञाणं, पहानट्ठे पञ्ञा समुदये ञाणं, सच्छिकिरियट्ठे पञ्ञा निरोधे ञाणं, भावनट्ठे पञ्ञा मग्गे ञाणं? दुक्खस्स पीळनट्ठो सङ्खतट्ठो सन्तापट्ठो विपरिणामट्ठो परिञ्ञातट्ठो; समुदयस्स आयूहनट्ठो निदानट्ठो सञ्ञोगट्ठो पलिबोधट्ठो पहानट्ठो; निरोधस्स निस्सरणट्ठो विवेकट्ठो असङ्खतट्ठो अमतट्ठो सच्छिकिरियट्ठो; मग्गस्स निय्यानट्ठो हेतुट्ठो दस्सनट्ठो आधिपतेय्यट्ठो भावनट्ठो. तं ञातट्ठेन ञाणं, पजाननट्ठेन पञ्ञा. तेन वुच्चति – ‘‘परिञ्ञट्ठे पञ्ञा दुक्खे ञाणं, पहानट्ठे पञ्ञा समुदये ञाणं, सच्छिकिरियट्ठे पञ्ञा निरोधे ञाणं, भावनट्ठे पञ्ञा मग्गे ञाणं’’.

१०९. कथं दुक्खे ञाणं, दुक्खसमुदये ञाणं, दुक्खनिरोधे ञाणं, दुक्खनिरोधगामिनिया पटिपदाय ञाणं? मग्गसमङ्गिस्स ञाणं दुक्खे पेतं ञाणं, दुक्खसमुदये पेतं ञाणं, दुक्खनिरोधे पेतं ञाणं, दुक्खनिरोधगामिनिया पटिपदाय पेतं ञाणं.

तत्थ कतमं दुक्खे ञाणं? दुक्खं आरब्भ या उप्पज्जति पञ्ञा पजानना विचयो पविचयो धम्मविचयो सल्लक्खणा उपलक्खणा पच्चुपलक्खणा पण्डिच्चं कोसल्लं नेपुञ्ञं वेभब्या चिन्ता उपपरिक्खा भूरि मेधा परिणायिका विपस्सना सम्पजञ्ञं पतोदो पञ्ञा पञ्ञिन्द्रियं पञ्ञाबलं पञ्ञासत्थं पञ्ञापासादो पञ्ञाआलोको पञ्ञाओभासो पञ्ञापज्जोतो पञ्ञारतनं अमोहो धम्मविचयो सम्मादिट्ठि – इदं वुच्चति दुक्खे ञाणं. दुक्खसमुदयं आरब्भ…पे… दुक्खनिरोधं आरब्भ…पे… दुक्खनिरोधगामिनिं पटिपदं आरब्भ या उप्पज्जति पञ्ञा पजानना…पे… अमोहो धम्मविचयो सम्मादिट्ठि – इदं वुच्चति दुक्खनिरोधगामिनिया पटिपदाय ञाणं. तं ञातट्ठेन ञाणं, पजाननट्ठेन पञ्ञा. तेन वुच्चति – ‘‘दुक्खे ञाणं, दुक्खसमुदये ञाणं, दुक्खनिरोधे ञाणं, दुक्खनिरोधगामिनिया पटिपदाय ञाणं’’.

सच्चञाणचतुक्कद्वयनिद्देसो तेसट्ठिमो.