१. विसारदसुत्तवण्णना

३०४. दसमे रूपबलन्तिआदीसु रूपसम्पत्ति रूपबलं, भोगसम्पत्ति भोगबलं, ञातिसम्पत्ति ञातिबलं, पुत्तसम्पत्ति पुत्तबलं, सीलसम्पत्ति सीलबलं. पञ्चसीलदससीलानि अखण्डानि कत्वा रक्खन्तस्स हि सीलसम्पत्तियेव सीलबलं नाम होति. इमानि खो भिक्खवे पञ्च बलानीति इमानि पञ्च उपत्थम्भनट्ठेन बलानि नाम वुच्चन्ति.