(२) अतीतवारो

(क) अनुलोमपुग्गलो

११०. (क) यस्स रूपक्खन्धो निरुज्झित्थ तस्स वेदनाक्खन्धो निरुज्झित्थाति? आमन्ता.

(ख) यस्स वा पन वेदनाक्खन्धो निरुज्झित्थ तस्स रूपक्खन्धो निरुज्झित्थाति? आमन्ता.

(ख) अनुलोमओकासो

१११. (क) यत्थ रूपक्खन्धो निरुज्झित्थ तत्थ वेदनाक्खन्धो निरुज्झित्थाति?

असञ्ञसत्ते तत्थ रूपक्खन्धो निरुज्झत्थ, नो च तत्थ वेदनाक्खन्धो निरुज्झित्थ. पञ्चवोकारे तत्थ रूपक्खन्धो च निरुज्झित्थ वेदनाक्खन्धो च निरुज्झित्थ.

(ख) यत्थ वा पन वेदनाक्खन्धो निरुज्झित्थ तत्थ रूपक्खन्धो निरुज्झित्थाति?

अरूपे तत्थ वेदनाक्खन्धो निरुज्झित्थ, नो च तत्थ रूपक्खन्धो निरुज्झित्थ. पञ्चवोकारे तत्थ वेदनाक्खन्धो च निरुज्झित्थ रूपक्खन्धो च निरुज्झित्थ.

(ग) अनुलोमपुग्गलोकासा

११२. (क) यस्स यत्थ रूपक्खन्धो निरुज्झित्थ तस्स तत्थ वेदनाक्खन्धो निरुज्झित्थाति?

असञ्ञसत्तानं तेसं तत्थ रूपक्खन्धो निरुज्झित्थ, नो च तेसं तत्थ वेदनाक्खन्धो निरुज्झित्थ. पञ्चवोकारानं तेसं तत्थ रूपक्खन्धो च निरुज्झित्थ वेदनाक्खन्धो च निरुज्झित्थ.

(ख) यस्स वा पन यत्थ वेदनाक्खन्धो निरुज्झित्थ तस्स तत्थ रूपक्खन्धो निरुज्झित्थाति?

अरूपानं तेसं तत्थ वेदनाक्खन्धो निरुज्झित्थ, नो च तेसं तत्थ रूपक्खन्धो निरुज्झित्थ. पञ्चवोकारानं तेसं तत्थ वेदनाक्खन्धो च निरुज्झित्थ रूपक्खन्धो च निरुज्झित्थ.

(घ) पच्चनीकपुग्गलो

११३. (क) यस्स रूपक्खन्धो न निरुज्झित्थ तस्स वेदनाक्खन्धो न निरुज्झित्थाति? नत्थि.

(ख) यस्स वा पन वेदनाक्खन्धो न निरुज्झित्थ तस्स रूपक्खन्धो न निरुज्झित्थाति? नत्थि.

(ङ) पच्चनीकओकासो

११४. (क) यत्थ रूपक्खन्धो न निरुज्झित्थ तत्थ वेदनाक्खन्धो न निरुज्झित्थाति? निरुज्झित्थ.

(ख) यत्थ वा पन वेदनाक्खन्धो न निरुज्झित्थ तत्थ रूपक्खन्धो न निरुज्झित्थाति? निरुज्झित्थ.

(च) पच्चनीकपुग्गलोकासा

११५. (क) यस्स यत्थ रूपक्खन्धो न निरुज्झित्थ तस्स तत्थ वेदनाक्खन्धो न निरुज्झित्थाति?

अरूपानं तेसं तत्थ रूपक्खन्धो न निरुज्झित्थ, नो च तेसं तत्थ वेदनाक्खन्धो न निरुज्झित्थ. सुद्धावासानं तेसं तत्थ रूपक्खन्धो च न निरुज्झित्थ वेदनाक्खन्धो च न निरुज्झित्थ.

(ख) यस्स वा पन यत्थ वेदनाक्खन्धो न निरुज्झित्थ तस्स तत्थ रूपक्खन्धो न निरुज्झित्थाति?

असञ्ञसत्तानं तेसं तत्थ वेदनाक्खन्धो न निरुज्झित्थ, नो च तेसं तत्थ रूपक्खन्धो न निरुज्झित्थ. सुद्धावासानं तेसं तत्थ वेदनाक्खन्धो च न निरुज्झित्थ रूपक्खन्धो च न निरुज्झित्थ.