३. पच्चयानुलोमपच्चनीयं
हेतुदुकं
९५. हेतुपच्चया नआरम्मणे छ…पे… नसमनन्तरे छ, नअञ्ञमञ्ञे द्वे, नउपनिस्सये छ…पे… नमग्गे छ, नसम्पयुत्ते द्वे, नविप्पयुत्ते तीणि, नोनत्थिया छ, नोविगते छ.
४. पच्चयपच्चनीयानुलोमं
९६. नहेतुपच्चया आरम्मणे नव, अधिपतिया पञ्च (अनुलोमपदानि गणितब्बानि), अविगते नव.
सञ्ञोजनसम्पयुत्तदुकं निट्ठितं.