२. सङ्ख्यावारो

सुद्धं

४६. हेतुया नव, आरम्मणे छ, अधिपतिया पञ्च, अनन्तरे छ, समनन्तरे छ, सहजाते नव, अञ्ञमञ्ञे छ, निस्सये नव, उपनिस्सये छ, पुरेजाते छ, आसेवने छ, कम्मे नव, विपाके एकं, आहारे नव, इन्द्रिये नव, झाने नव, मग्गे नव, सम्पयुत्ते छ, विप्पयुत्ते नव, अत्थिया नव, नत्थिया छ, विगते छ, अविगते नव.

अनुलोमं.