२. सङ्ख्यावारो

सुद्धं

९१. हेतुया तीणि, आरम्मणे छ, अधिपतिया एकं, अनन्तरे छ, समनन्तरे छ, सहजाते छ, अञ्ञमञ्ञे छ, निस्सये छ, उपनिस्सये छ, पुरेजाते छ…पे… विपाके द्वे, आहारे छ, इन्द्रिये छ, झाने छ, मग्गे पञ्च…पे… अविगते छ (एवं गणेतब्बं).

अनुलोमं.