१९. एकूनवीसतिमवग्गो
(१९२) ७. अच्चन्तनियामकथा
८४७. अत्थि पुथुज्जनस्स अच्चन्तनियामताति? आमन्ता. मातुघातको अच्चन्तनियतो, पितुघातको…पे… अरहन्तघातको…पे… रुहिरुप्पादको …पे… सङ्घभेदको अच्चन्तनियतोति? न हेवं वत्तब्बे…पे….
८४८. अत्थि पुथुज्जनस्स अच्चन्तनियामताति? आमन्ता. अच्चन्तनियतस्स पुग्गलस्स विचिकिच्छा उप्पज्जेय्याति? आमन्ता. हञ्चि अच्चन्तनियतस्स पुग्गलस्स विचिकिच्छा उप्पज्जेय्य, नो च वत रे वत्तब्बे – ‘‘अत्थि पुथुज्जनस्स अच्चन्तनियामता’’ति.
अच्चन्तनियतस्स पुग्गलस्स विचिकिच्छा नुप्पज्जेय्याति? आमन्ता. पहीनाति? न हेवं वत्तब्बे…पे… पहीनाति? आमन्ता. सोतापत्तिमग्गेनाति? न हेवं वत्तब्बे…पे… सकदागामिमग्गेन …पे… अनागामिमग्गेन…पे… अरहत्तमग्गेनाति? न हेवं वत्तब्बे…पे….
कतमेन मग्गेनाति? अकुसलेन मग्गेनाति. अकुसलो मग्गो निय्यानिको खयगामी बोधगामी अनासवो…पे… असंकिलेसिकोति? न हेवं वत्तब्बे…पे… ननु अकुसलो मग्गो अनिय्यानिको…पे… संकिलेसिकोति? आमन्ता. हञ्चि अकुसलो मग्गो अनिय्यानिको…पे… संकिलेसिको, नो च वत रे वत्तब्बे – ‘‘अच्चन्तनियतस्स पुग्गलस्स विचिकिच्छा अकुसलेन मग्गेन पहीना’’ति.
८४९. सस्सतदिट्ठिया नियतस्स पुग्गलस्स उच्छेददिट्ठि उप्पज्जेय्याति? आमन्ता. हञ्चि सस्सतदिट्ठिया नियतस्स पुग्गलस्स उच्छेददिट्ठि उप्पज्जेय्य, नो च वत रे वत्तब्बे – ‘‘अत्थि पुथुज्जनस्स अच्चन्तनियामता’’ति.
सस्सतदिट्ठिया नियतस्स पुग्गलस्स उच्छेददिट्ठि नुप्पज्जेय्याति? आमन्ता. पहीनाति? न हेवं वत्तब्बे…पे… पहीनाति? आमन्ता. सोतापत्तिमग्गेनाति? न हेवं वत्तब्बे…पे… सकदागामिमग्गेन…पे… अनागामिमग्गेन…पे… अरहत्तमग्गेनाति? न हेवं वत्तब्बे…पे….
कतमेन मग्गेनाति? अकुसलेन मग्गेन. अकुसलो मग्गो…पे… नो च वत रे वत्तब्बे – ‘‘सस्सतदिट्ठिया नियतस्स पुग्गलस्स उच्छेददिट्ठि अकुसलेन मग्गेन पहीना’’ति.
८५०. उच्छेददिट्ठिया नियतस्स पुग्गलस्स सस्सतदिट्ठि उप्पज्जेय्याति? आमन्ता. हञ्चि उच्छेददिट्ठिया नियतस्स पुग्गलस्स सस्सतदिट्ठि उप्पज्जेय्य, नो च वत रे वत्तब्बे – ‘‘अत्थि पुथुज्जनस्स अच्चन्तनियामता’’ति.
उच्छेददिट्ठिया नियतस्स पुग्गलस्स सस्सतदिट्ठि नुप्पज्जेय्याति? आमन्ता. पहीनाति? न हेवं वत्तब्बे…पे… पहीनाति? आमन्ता. सोतापत्तिमग्गेनाति? न हेवं वत्तब्बे …पे… सकदागामिमग्गेन…पे… अनागामिमग्गेन…पे… अरहत्तमग्गेनाति? न हेवं वत्तब्बे…पे….
कतमेन मग्गेनाति? अकुसलेन मग्गेनाति. अकुसलो मग्गो…पे… नो च वत रे वत्तब्बे – ‘‘उच्छेददिट्ठिया नियतस्स पुग्गलस्स सस्सतदिट्ठि अकुसलेन मग्गेन पहीना’’ति.
८५१. न वत्तब्बं – ‘‘अत्थि पुथुज्जनस्स अच्चन्तनियामता’’ति? आमन्ता. ननु वुत्तं भगवता – ‘‘इध, भिक्खवे, एकच्चो पुग्गलो समन्नागतो होति एकन्तकाळकेहि अकुसलेहि धम्मेहि, सो [एवं खो भिक्खवे पुग्गलो (अ. नि. ७.१५)] सकिं निमुग्गो निमुग्गोव होती’’ति [अ. नि. ७.१५]! अत्थेव सुत्तन्तोति? आमन्ता. तेन हि अत्थि पुथुज्जनस्स अच्चन्तनियामताति.
८५२. वुत्तं भगवता – ‘‘इध, भिक्खवे, एकच्चो पुग्गलो समन्नागतो होति एकन्तकाळकेहि अकुसलेहि धम्मेहि, सो सकिं निमुग्गो निमुग्गोव होती’’ति कत्वा तेन च कारणेन अत्थि पुथुज्जनस्स अच्चन्तनियामताति? आमन्ता. वुत्तं भगवता – ‘‘इध, भिक्खवे, एकच्चो पुग्गलो उम्मुज्जित्वा निमुज्जती’’ति [अ. नि. ७.१५]! अत्थेव सुत्तन्तोति? आमन्ता. सब्बकालं उम्मुज्जित्वा निमुज्जतीति? न हेवं वत्तब्बे…पे….
वुत्तं भगवता – ‘‘इध, भिक्खवे, एकच्चो पुग्गलो समन्नागतो होति एकन्तकाळकेहि अकुसलेहि धम्मेहि, सो सकिं निमुग्गो निमुग्गोव होती’’ति – कत्वा तेन च कारणेन अत्थि पुथुज्जनस्स अच्चन्तनियामताति? आमन्ता. वुत्तं भगवता – ‘‘इध, भिक्खवे, एकच्चो पुग्गलो उम्मुज्जित्वा ठितो होति, उम्मुज्जित्वा विपस्सति विलोकेति, उम्मुज्जित्वा पतरति, उम्मुज्जित्वा पतिगाधप्पत्तो होती’’ति [अ. नि. ७.१५]! अत्थेव सुत्तन्तोति? आमन्ता. सब्बकालं उम्मुज्जित्वा पतिगाधप्पत्तो होतीति? न हेवं वत्तब्बे…पे….
अच्चन्तनियामकथा निट्ठिता.