(११८) ३. सद्दो विपाकोतिकथा
६३६. सद्दो विपाकोति? आमन्ता. सुखवेदनियो दुक्खवेदनियो अदुक्खमसुखवेदनियो, सुखाय वेदनाय सम्पयुत्तो, दुक्खाय वेदनाय सम्पयुत्तो, अदुक्खमसुखाय वेदनाय सम्पयुत्तो, फस्सेन सम्पयुत्तो, वेदनाय सम्पयुत्तो, सञ्ञाय सम्पयुत्तो, चेतनाय सम्पयुत्तो, चित्तेन सम्पयुत्तो, सारम्मणो; अत्थि तस्स आवट्टना आभोगो समन्नाहारो मनसिकारो चेतना पत्थना पणिधीति? न हेवं वत्तब्बे…पे… ननु न सुखवेदनियो न दुक्खवेदनियो…पे… अनारम्मणो, नत्थि तस्स आवट्टना…पे… पणिधीति? आमन्ता. हञ्चि न सुखवेदनियो…पे… अनारम्मणो, नत्थि तस्स आवट्टना…पे… पणिधि, नो च वत रे वत्तब्बे – ‘‘सद्दो विपाको’’ति.
फस्सो विपाको, फस्सो सुखवेदनियो…पे… सारम्मणो, अत्थि तस्स आवट्टना…पे… पणिधीति? आमन्ता. सद्दो विपाको, सद्दो सुखवेदनियो…पे… सारम्मणो, अत्थि तस्स आवट्टना…पे… पणिधीति? न हेवं वत्तब्बे…पे….
सद्दो विपाको, सद्दो न सुखवेदनियो…पे… अनारम्मणो, नत्थि तस्स आवट्टना…पे… पणिधीति? आमन्ता. फस्सो विपाको, फस्सो न सुखवेदनियो, न दुक्खवेदनियो…पे… अनारम्मणो, नत्थि तस्स आवट्टना…पे… पणिधीति? न हेवं वत्तब्बे…पे….
६३७. न वत्तब्बं – ‘‘सद्दो विपाको’’ति? आमन्ता. ननु वुत्तं भगवता – ‘‘सो तस्स कम्मस्स कतत्ता उपचितत्ता उस्सन्नत्ता विपुलत्ता ब्रह्मस्सरो होति करविकभाणी’’ति [दीघनिकाये]! अत्थेव सुत्तन्तोति? आमन्ता. तेन हि सद्दो विपाकोति.
सद्दो विपाकोतिकथा निट्ठिता.