४. चतुत्थवग्गो
(३३) १. गिहिस्स अरहातिकथा
३८७. गिहिस्स अरहाति? आमन्ता. अत्थि अरहतो गिहिसंयोजनन्ति? न हेवं वत्तब्बे…पे… नत्थि अरहतो गिहिसंयोजनन्ति? आमन्ता. हञ्चि नत्थि अरहतो गिहिसंयोजनं, नो च वत रे वत्तब्बे – ‘‘गिहिस्स अरहा’’ति.
गिहिस्स अरहाति? आमन्ता. ननु अरहतो गिहिसंयोजनं पहीनं उच्छिन्नमूलं तालावत्थुकतं अनभावङ्कतं आयतिं अनुप्पादधम्मन्ति? आमन्ता. हञ्चि अरहतो गिहिसंयोजनं पहीनं उच्छिन्नमूलं तालावत्थुकतं अनभावङ्कतं आयतिं अनुप्पादधम्मं, नो च वत रे वत्तब्बे – ‘‘गिहिस्स अरहा’’ति.
गिहिस्स अरहाति? आमन्ता. अत्थि कोचि गिही गिहिसंयोजनं अप्पहाय दिट्ठेव धम्मे दुक्खस्सन्तकरोति [म. नि. २.१८६]? नत्थि. हञ्चि नत्थि कोचि गिही गिहिसंयोजनं अप्पहाय दिट्ठेव धम्मे दुक्खस्सन्तकरो, नो च वत रे वत्तब्बे – ‘‘गिहिस्स अरहा’’ति.
गिहिस्स अरहाति? आमन्ता. ननु वच्छगोत्तो परिब्बाजको भगवन्तं एतदवोच – ‘‘अत्थि नु खो, भो गोतम, कोचि गिही गिहिसंयोजनं अप्पहाय कायस्स भेदा दुक्खस्सन्तकरो’’ति? ‘‘नत्थि खो, वच्छ, कोचि गिही गिहिसंयोजनं अप्पहाय कायस्स भेदा दुक्खस्सन्तकरो’’ति. अत्थेव सुत्तन्तोति? आमन्ता. तेन हि न वत्तब्बं – ‘‘गिहिस्स अरहा’’ति.
गिहिस्स अरहाति? आमन्ता. अरहा मेथुनं धम्मं पटिसेवेय्य, मेथुनं उप्पादेय्य, पुत्तसम्बाधसयनं अज्झावसेय्य, कासिकचन्दनं पच्चनुभवेय्य, मालागन्धविलेपनं धारेय्य, जातरूपरजतं सादियेय्य, अजेळकं पटिग्गण्हेय्य, कुक्कुटसूकरं पटिग्गण्हेय्य, हत्थिगवस्सवळवं पटिग्गण्हेय्य, तित्तिरवट्टकमोरकपिञ्जरं [… कपिञ्जलं (स्या. कं. पी.)] पटिग्गण्हेय्य, चित्तवण्डवालमोळिं [पीतवण्टवालमोळिकं (स्या. कं. पी.)] धारेय्य, ओदातानि वत्थानि दीघदसानि धारेय्य, यावजीवं अगारियभूतो अस्साति? न हेवं वत्तब्बे…पे….
न वत्तब्बं – ‘‘गिहिस्स अरहा’’ति? आमन्ता. ननु यसो कुलपुत्तो, उत्तियो गहपति, सेतु माणवो, गिहिब्यञ्जनेन अरहत्तं पत्तोति? आमन्ता. हञ्चि यसो कुलपुत्तो, उत्तियो गहपति, सेतु माणवो, गिहिब्यञ्जनेन अरहत्तं पत्तो, तेन वत रे वत्तब्बे – ‘‘गिहिस्स अरहा’’ति.
गिहिस्स अरहातिकथा निट्ठिता.
४. चतुत्थवग्गो
(३४) २. उपपत्तिकथा
३८८. सह उपपत्तिया अरहाति? आमन्ता. सह उपपत्तिया सोतापन्नो होतीति? न हेवं वत्तब्बे…पे….
सह उपपत्तिया अरहाति? आमन्ता. सह उपपत्तिया सकदागामी होतीति? न हेवं वत्तब्बे…पे….
सह उपपत्तिया अरहाति? आमन्ता. सह उपपत्तिया अनागामी होतीति? न हेवं वत्तब्बे…पे….
सह उपपत्तिया सोतापन्नो न होतीति? आमन्ता. हञ्चि सह उपपत्तिया सोतापन्नो न होति, नो च वत रे वत्तब्बे – ‘‘सह उपपत्तिया अरहा’’ति.
सह उपपत्तिया सकदागामी न होतीति? आमन्ता. हञ्चि सह उपपत्तिया सकदागामी न होति, नो च वत रे वत्तब्बे – ‘‘सह उपपत्तिया अरहा’’ति.
सह उपपत्तिया अनागामी न होतीति? आमन्ता. हञ्चि सह उपपत्तिया अनागामी न होति, नो च वत रे वत्तब्बे – ‘‘सह उपपत्तिया अरहा’’ति.
३८९. सह उपपत्तिया अरहाति? आमन्ता. सारिपुत्तो थेरो सह उपपत्तिया अरहाति? न हेवं वत्तब्बे. महामोग्गल्लानो थेरो …पे… महाकस्सपो थेरो…पे… महाकच्चानो थेरो…पे… महाकोट्ठिको थेरो…पे… महापन्थको थेरो सह उपपत्तिया अरहाति? न हेवं वत्तब्बे…पे….
सारिपुत्तो थेरो न सह उपपत्तिया अरहाति? आमन्ता. हञ्चि सारिपुत्तो थेरो न सह उपपत्तिया अरहा, नो च वत रे वत्तब्बे – ‘‘सह उपपत्तिया अरहा’’ति.
महामोग्गल्लानो थेरो…पे… महाकस्सपो थेरो…पे… महाकच्चानो थेरो…पे… महाकोट्ठिको थेरो…पे… महापन्थको थेरो न सह उपपत्तिया अरहाति? आमन्ता. हञ्चि महापन्थको थेरो न सह उपपत्तिया अरहा, नो च वत रे वत्तब्बे – ‘‘सह उपपत्तिया अरहा’’ति.
३९०. सह उपपत्तिया अरहाति? आमन्ता. उपपत्तेसियेन चित्तेन अरहत्तं सच्छिकरोति लोकियेन सासवेन…पे… संकिलेसियेनाति? न हेवं वत्तब्बे…पे….
सह उपपत्तिया अरहाति? आमन्ता. उपपत्तेसियं चित्तं निय्यानिकं खयगामी बोधगामी अपचयगामी अनासवं…पे… असंकिलेसियन्ति? न हेवं वत्तब्बे…पे….
ननु उपपत्तेसियं चित्तं अनिय्यानिकं न खयगामि न बोधगामि न अपचयगामि सासवं…पे… संकिलेसियन्ति? आमन्ता. हञ्चि उपपत्तेसियं चित्तं अनिय्यानिकं न खयगामि न बोधगामि न अपचयगामि सासवं…पे… संकिलेसियं, नो च वत रे वत्तब्बे – ‘‘सह उपपत्तिया अरहा’’ति.
सह उपपत्तिया अरहाति? आमन्ता. उपपत्तेसियेन चित्तेन रागं पजहति, दोसं पजहति, मोहं पजहति, अनोत्तप्पं पजहतीति? न हेवं वत्तब्बे…पे….
सह उपपत्तिया अरहाति? आमन्ता. उपपत्तेसियं चित्तं मग्गो… सतिपट्ठानं…पे… सम्मप्पधानं… इद्धिपादो… इन्द्रियं… बलं… बोज्झङ्गोति? न हेवं वत्तब्बे…पे….
सह उपपत्तिया अरहाति? आमन्ता. उपपत्तेसियेन चित्तेन दुक्खं परिजानाति, समुदयं पजहति, निरोधं सच्छिकरोति, मग्गं भावेतीति? न हेवं वत्तब्बे …पे… सह उपपत्तिया अरहाति? आमन्ता. चुतिचित्तं मग्गचित्तं उपपत्तेसियं चित्तं फलचित्तन्ति? न हेवं वत्तब्बे…पे….
उपपत्तिकथा निट्ठिता.
४. चतुत्थवग्गो
(३५) ३. अनासवकथा
३९१. अरहतो सब्बे धम्मा अनासवाति? आमन्ता. मग्गो फलं निब्बानं, सोतापत्तिमग्गो सोतापत्तिफलं, सकदागामिमग्गो सकदागामिफलं, अनागामिमग्गो अनागामिफलं, अरहत्तमग्गो अरहत्तफलं, सतिपट्ठानं सम्मप्पधानं इद्धिपादो इन्द्रियं बलं बोज्झङ्गोति? न हेवं वत्तब्बे…पे….
अरहतो सब्बे धम्मा अनासवाति? आमन्ता. अरहतो चक्खुं अनासवन्ति? न हेवं वत्तब्बे…पे…. अरहतो चक्खुं अनासवन्ति? आमन्ता. मग्गो फलं निब्बानं, सोतापत्तिमग्गो सोतापत्तिफलं…पे… बोज्झङ्गोति? न हेवं वत्तब्बे…पे….
अरहतो सोतं…पे… अरहतो घानं… अरहतो जिव्हा… अरहतो कायो अनासवोति? न हेवं वत्तब्बे …पे… अरहतो कायो अनासवोति? आमन्ता. मग्गो फलं निब्बानं, सोतापत्तिमग्गो सोतापत्तिफलं…पे… बोज्झङ्गोति? न हेवं वत्तब्बे…पे….
अरहतो कायो अनासवोति? आमन्ता. अरहतो कायो पग्गहनिग्गहुपगो छेदनभेदनुपगो काकेहि गिज्झेहि कुललेहि साधारणोति? आमन्ता. अनासवो धम्मो पग्गहनिग्गहुपगो छेदनभेदनुपगो काकेहि गिज्झेहि कुललेहि साधारणोति? न हेवं वत्तब्बे …पे….
अरहतो काये विसं कमेय्य, सत्थं कमेय्य, अग्गि कमेय्याति? आमन्ता. अनासवे धम्मे विसं कमेय्य, सत्थं कमेय्य, अग्गि कमेय्याति? न हेवं वत्तब्बे…पे….
लब्भा अरहतो कायो अद्दुबन्धनेन बन्धितुं, रज्जुबन्धनेन बन्धितुं, सङ्खलिकबन्धनेन बन्धितुं, गामबन्धनेन बन्धितुं, निगमबन्धनेन बन्धितुं, नगरबन्धनेन बन्धितुं, जनपदबन्धनेन बन्धितुं, कण्ठपञ्चमेहि बन्धनेहि बन्धितुन्ति? आमन्ता. लब्भा अनासवो धम्मो अद्दुबन्धनेन बन्धितुं, रज्जुबन्धनेन बन्धितुं, सङ्खलिकबन्धनेन बन्धितुं, गामनिगमनगरजनपदबन्धनेन बन्धितुं, कण्ठपञ्चमेहि बन्धनेहि बन्धितुन्ति? न हेवं वत्तब्बे…पे….
३९२. यदि अरहा पुथुज्जनस्स चीवरं देति, अनासवं हुत्वा सासवं होतीति? न हेवं वत्तब्बे…पे… अनासवं हुत्वा सासवं होतीति? आमन्ता. तञ्ञेव अनासवं तं सासवन्ति? न हेवं वत्तब्बे…पे… तञ्ञेव अनासवं तं सासवन्ति? आमन्ता. मग्गो अनासवो हुत्वा सासवो होतीति? न हेवं वत्तब्बे…पे… फलं… सतिपट्ठानं… सम्मप्पधानं… इद्धिपादो… इन्द्रियं… बलं… बोज्झङ्गो अनासवो हुत्वा सासवो होतीति? न हेवं वत्तब्बे…पे….
यदि अरहा पुथुज्जनस्स पिण्डपातं देति, सेनासनं देति, गिलानपच्चयभेसज्जपरिक्खारं देति, अनासवो हुत्वा सासवो होतीति? न हेवं वत्तब्बे…पे… अनासवो हुत्वा सासवो होतीति? आमन्ता. तञ्ञेव अनासवं तं सासवन्ति? न हेवं वत्तब्बे…पे… तञ्ञेव अनासवं तं सासवन्ति? आमन्ता. मग्गो अनासवो हुत्वा सासवो होतीति? न हेवं वत्तब्बे…पे… फलं… सतिपट्ठानं… सम्मप्पधानं… इद्धिपादो… इन्द्रियं… बलं… बोज्झङ्गो अनासवो हुत्वा सासवो होतीति? न हेवं वत्तब्बे…पे….
यदि पुथुज्जनो अरहतो चीवरं देति, सासवं हुत्वा अनासवं होतीति? न हेवं वत्तब्बे…पे… सासवं हुत्वा अनासवं होतीति? आमन्ता. तञ्ञेव सासवं तं अनासवन्ति? न हेवं वत्तब्बे…पे… तञ्ञेव सासवं तं अनासवन्ति? आमन्ता. रागो सासवो हुत्वा अनासवो होतीति? न हेवं वत्तब्बे…पे… दोसो…पे… मोहो…पे… अनोत्तप्पं सासवं हुत्वा अनासवं होतीति? न हेवं वत्तब्बे…पे….
यदि पुथुज्जनो अरहतो पिण्डपातं देति, सेनासनं देति, गिलानपच्चयभेसज्जपरिक्खारं देति, सासवो हुत्वा अनासवो होतीति? न हेवं वत्तब्बे…पे… सासवो हुत्वा अनासवो होतीति? आमन्ता. तञ्ञेव सासवं तं अनासवन्ति? न हेवं वत्तब्बे…पे… तञ्ञेव सासवं तं अनासवन्ति? आमन्ता. रागो सासवो हुत्वा अनासवो होतीति? न हेवं वत्तब्बे…पे… दोसो…पे… मोहो…पे… अनोत्तप्पं सासवं हुत्वा अनासवं होतीति? न हेवं वत्तब्बे…पे….
न वत्तब्बं – ‘‘अरहतो सब्बे धम्मा अनासवा’’ति? आमन्ता. ननु अरहा अनासवोति? आमन्ता. हञ्चि अरहा अनासवो, तेन वत रे वत्तब्बे – ‘‘अरहतो सब्बे धम्मा अनासवा’’ति.
अनासवकथा निट्ठिता.
४. चतुत्थवग्गो
(३६) ४. समन्नागतकथा
३९३. अरहा चतूहि फलेहि समन्नागतोति? आमन्ता. अरहा चतूहि फस्सेहि चतूहि वेदनाहि चतूहि सञ्ञाहि चतूहि चेतनाहि चतूहि चित्तेहि चतूहि सद्धाहि चतूहि वीरियेहि चतूहि सतीहि चतूहि समाधीहि चतूहि पञ्ञाहि समन्नागतोति? न हेवं वत्तब्बे…पे….
अनागामी तीहि फलेहि समन्नागतोति? आमन्ता. अनागामी तीहि फस्सेहि…पे… तीहि पञ्ञाहि समन्नागतोति? न हेवं वत्तब्बे…पे….
सकदागामी द्वीहि फलेहि समन्नागतोति? आमन्ता. सकदागामी द्वीहि फस्सेहि…पे… द्वीहि पञ्ञाहि समन्नागतोति? न हेवं वत्तब्बे…पे….
अरहा सोतापत्तिफलेन समन्नागतोति? आमन्ता. अरहा सोतापन्नो सत्तक्खत्तुपरमो, कोलङ्कोलो, एकबीजीति? न हेवं वत्तब्बे…पे… अरहा सकदागामिफलेन समन्नागतोति? आमन्ता. अरहा सकदागामीति? न हेवं वत्तब्बे …पे… अरहा अनागामिफलेन समन्नागतोति? आमन्ता. अरहा अनागामी, अन्तरापरिनिब्बायी, उपहच्चपरिनिब्बायी, असङ्खारपरिनिब्बायी, ससङ्खारपरिनिब्बायी, उद्धंसोतो अकनिट्ठगामीति? न हेवं वत्तब्बे…पे….
अनागामी सोतापत्तिफलेन समन्नागतोति? आमन्ता. अनागामी सोतापन्नो सत्तक्खत्तुपरमो, कोलङ्कोलो, एकबीजीति? न हेवं वत्तब्बे …पे… अनागामी सकदागामिफलेन समन्नागतोति? आमन्ता. अनागामी सकदागामीति? न हेवं वत्तब्बे…पे….
सकदागामी सोतापत्तिफलेन समन्नागतोति? आमन्ता. सकदागामी सोतापन्नो सत्तक्खत्तुपरमो, कोलङ्कोलो, एकबीजीति? न हेवं वत्तब्बे…पे….
३९४. सोतापत्तिफलेन समन्नागतो ‘‘सोतापन्नो’’ति वत्तब्बोति? आमन्ता. अरहा सोतापत्तिफलेन समन्नागतोति? आमन्ता. स्वेव अरहा, सो सोतापन्नोति? न हेवं वत्तब्बे…पे….
सकदागामिफलेन समन्नागतो ‘‘सकदागामी’’ति वत्तब्बोति? आमन्ता. अरहा सकदागामिफलेन समन्नागतोति? आमन्ता. स्वेव अरहा, सो सकदागामीति? न हेवं वत्तब्बे…पे….
अनागामिफलेन समन्नागतो ‘‘अनागामी’’ति वत्तब्बोति? आमन्ता. अरहा अनागामिफलेन समन्नागतोति? आमन्ता. स्वेव अरहा, सो अनागामीति? न हेवं वत्तब्बे…पे….
सोतापत्तिफलेन समन्नागतो ‘‘सोतापन्नो’’ति वत्तब्बोति? आमन्ता. अनागामी सोतापत्तिफलेन समन्नागतोति? आमन्ता. स्वेव अनागामी, सो सोतापन्नोति? न हेवं वत्तब्बे…पे….
सकदागामिफलेन समन्नागतो ‘‘सकदागामी’’ति वत्तब्बोति? आमन्ता. अनागामी सकदागामिफलेन समन्नागतोति? आमन्ता. स्वेव अनागामी, सो सकदागामीति? न हेवं वत्तब्बे…पे….
सोतापत्तिफलेन समन्नागतो ‘‘सोतापन्नो’’ति वत्तब्बोति? आमन्ता. सकदागामी सोतापत्तिफलेन समन्नागतोति? आमन्ता. स्वेव सकदागामी, सो सोतापन्नोति? न हेवं वत्तब्बे…पे….
३९५. अरहा सोतापत्तिफलेन समन्नागतोति? आमन्ता. ननु अरहा सोतापत्तिफलं वीतिवत्तोति? आमन्ता. हञ्चि अरहा सोतापत्तिफलं वीतिवत्तो, नो च वत रे वत्तब्बे – ‘‘अरहा सोतापत्तिफलेन समन्नागतो’’ति.
अरहा सोतापत्तिफलं वीतिवत्तो तेन समन्नागतोति? आमन्ता. अरहा सोतापत्तिमग्गं वीतिवत्तो, सक्कायदिट्ठिं विचिकिच्छं सीलब्बतपरामासं, अपायगमनीयं रागं, अपायगमनीयं दोसं, अपायगमनीयं मोहं वीतिवत्तो तेन समन्नागतोति? न हेवं वत्तब्बे…पे….
अरहा सकदागामिफलेन समन्नागतोति? आमन्ता. ननु अरहा सकदागामिफलं वीतिवत्तोति? आमन्ता. हञ्चि अरहा सकदागामिफलं वीतिवत्तो, नो च वत रे वत्तब्बे – ‘‘अरहा सकदागामिफलेन समन्नागतो’’ति.
अरहा सकदागामिफलं वीतिवत्तो तेन समन्नागतोति? आमन्ता. अरहा सकदागामिमग्गं वीतिवत्तो, ओळारिकं कामरागं, ओळारिकं ब्यापादं वीतिवत्तो तेन समन्नागतोति? न हेवं वत्तब्बे…पे….
अरहा अनागामिफलेन समन्नागतोति? आमन्ता. ननु अरहा अनागामिफलं वीतिवत्तोति? आमन्ता. हञ्चि अरहा अनागामिफलं वीतिवत्तो, नो च वत रे वत्तब्बे – ‘‘अरहा अनागामिफलेन समन्नागतो’’ति.
अरहा अनागामिफलं वीतिवत्तो तेन समन्नागतोति? आमन्ता. अरहा अनागामिमग्गं वीतिवत्तो, अणुसहगतं कामरागं, अणुसहगतं ब्यापादं वीतिवत्तो तेन समन्नागतोति? न हेवं वत्तब्बे…पे….
अनागामी सोतापत्तिफलेन समन्नागतोति? आमन्ता. ननु अनागामी सोतापत्तिफलं वीतिवत्तोति? आमन्ता. हञ्चि अनागामी सोतापत्तिफलं वीतिवत्तो, नो च वत रे वत्तब्बे – ‘‘अनागामी सोतापत्तिफलेन समन्नागतो’’ति.
अनागामी सोतापत्तिफलं वीतिवत्तो तेन समन्नागतोति? आमन्ता. अनागामी सोतापत्तिमग्गं वीतिवत्तो, सक्कायदिट्ठिं…पे… अपायगमनीयं मोहं वीतिवत्तो तेन समन्नागतोति? न हेवं वत्तब्बे…पे….
अनागामी सकदागामिफलेन समन्नागतोति? आमन्ता. ननु अनागामी सकदागामिफलं वीतिवत्तोति? आमन्ता. हञ्चि अनागामी सकदागामिफलं वीतिवत्तो, नो च वत रे वत्तब्बे – ‘‘अनागामी सकदागामिफलेन समन्नागतो’’ति.
अनागामी सकदागामिफलं वीतिवत्तो तेन समन्नागतोति? आमन्ता. अनागामी सकदागामिमग्गं वीतिवत्तो, ओळारिकं कामरागं, ओळारिकं ब्यापादं वीतिवत्तो तेन समन्नागतोति? न हेवं वत्तब्बे…पे….
सकदागामी सोतापत्तिफलेन समन्नागतोति? आमन्ता. ननु सकदागामी सोतापत्तिफलं वीतिवत्तोति? आमन्ता. हञ्चि सकदागामी सोतापत्तिफलं वीतिवत्तो, नो च वत रे वत्तब्बे – ‘‘सकदागामी सोतापत्तिफलेन समन्नागतो’’ति.
सकदागामी सोतापत्तिफलं वीतिवत्तो तेन समन्नागतोति? आमन्ता. सकदागामी सोतापत्तिमग्गं वीतिवत्तो, सक्कायदिट्ठिं…पे… अपायगमनीयं मोहं वीतिवत्तो तेन समन्नागतोति? न हेवं वत्तब्बे…पे….
३९६. न वत्तब्बं – ‘‘अरहा चतूहि फलेहि समन्नागतो’’ति? आमन्ता. ननु अरहता चत्तारि फलानि पटिलद्धानि, तेहि च अपरिहीनोति? आमन्ता. हञ्चि अरहता चत्तारि फलानि पटिलद्धानि तेहि च अपरिहीनो, तेन वत रे वत्तब्बे – ‘‘अरहा चतूहि फलेहि समन्नागतो’’ति.
न वत्तब्बं – ‘‘अनागामी तीहि फलेहि समन्नागतो’’ति? आमन्ता. ननु अनागामिना तीणि फलानि पटिलद्धानि, तेहि च अपरिहीनोति? आमन्ता. हञ्चि अनागामिना तीणि फलानि पटिलद्धानि तेहि च अपरिहीनो, तेन वत रे वत्तब्बे – ‘‘अनागामी तीहि फलेहि समन्नागतो’’ति.
न वत्तब्बं – ‘‘सकदागामी द्वीहि फलेहि समन्नागतो’’ति? आमन्ता. ननु सकदागामिना द्वे फलानि पटिलद्धानि, तेहि च अपरिहीनोति? आमन्ता. हञ्चि सकदागामिना द्वे फलानि पटिलद्धानि तेहि च अपरिहीनो, तेन वत रे वत्तब्बे – ‘‘सकदागामी द्वीहि फलेहि समन्नागतो’’ति.
अरहता चत्तारि फलानि पटिलद्धानि तेहि च अपरिहीनोति, अरहा चतूहि फलेहि समन्नागतोति? आमन्ता. अरहता चत्तारो मग्गा पटिलद्धा तेहि च अपरिहीनोति, अरहा चतूहि मग्गेहि समन्नागतोति? न हेवं वत्तब्बे…पे….
अनागामिना तीणि फलानि पटिलद्धानि तेहि च अपरिहीनोति, अनागामी तीहि फलेहि समन्नागतोति? आमन्ता. अनागामिना तयो मग्गा पटिलद्धा तेहि च अपरिहीनोति, अनागामी तीहि मग्गेहि समन्नागतोति? न हेवं वत्तब्बे…पे….
सकदागामिना द्वे फलानि पटिलद्धानि तेहि च अपरिहीनोति, सकदागामी द्वीहि फलेहि समन्नागतोति? आमन्ता. सकदागामिना द्वे मग्गा पटिलद्धा, तेहि च अपरिहीनोति, सकदागामी द्वीहि मग्गेहि समन्नागतोति? न हेवं वत्तब्बे…पे….
समन्नागतकथा निट्ठिता.
४. चतुत्थवग्गो
(३७) ५. उपेक्खासमन्नागतकथा
३९७. अरहा छहि उपेक्खाहि समन्नागतोति? आमन्ता. अरहा छहि फस्सेहि, छहि वेदनाहि, छहि सञ्ञाहि…पे… छहि पञ्ञाहि समन्नागतोति? न हेवं वत्तब्बे…पे….
अरहा छहि उपेक्खाहि समन्नागतोति? आमन्ता. अरहा चक्खुना रूपं पस्सन्तो सोतेन सद्दं सुणाति, घानेन गन्धं घायति, जिव्हाय रसं सायति, कायेन फोट्ठब्बं फुसति, मनसा धम्मं विजानाति…पे… मनसा धम्मं विजानन्तो चक्खुना रूपं पस्सति, सोतेन सद्दं सुणाति, घानेन गन्धं घायति, जिव्हाय रसं सायति, कायेन फोट्ठब्बं फुसतीति? न हेवं वत्तब्बे…पे….
अरहा छहि उपेक्खाहि समन्नागतोति? आमन्ता. सततं समितं अब्बोकिण्णं छहि उपेक्खाहि समन्नागतो समोहितो [समाहितो (स्या.)], छ उपेक्खायो पच्चुपट्ठिताति? न हेवं वत्तब्बे…पे….
न वत्तब्बं – ‘‘अरहा छहि उपेक्खाहि समन्नागतो’’ति? आमन्ता. ननु अरहा छळङ्गुपेक्खोति? आमन्ता. हञ्चि अरहा छळङ्गुपेक्खो, तेन वत रे वत्तब्बे – ‘‘अरहा छहि उपेक्खाहि समन्नागतो’’ति…पे….
उपेक्खासमन्नागतकथा निट्ठिता.
४. चतुत्थवग्गो
(३८) ६. बोधिया बुद्धोतिकथा
३९८. बोधिया बुद्धोति? आमन्ता. बोधिया निरुद्धाय विगताय पटिपस्सद्धाय अबुद्धो होतीति? न हेवं वत्तब्बे…पे….
बोधिया बुद्धोति? आमन्ता. अतीताय बोधिया बुद्धोति? न हेवं वत्तब्बे…पे… अतीताय बोधिया बुद्धोति? आमन्ता. ताय बोधिया बोधिकरणीयं करोतीति? न हेवं वत्तब्बे…पे….
ताय बोधिया बोधिकरणीयं करोतीति? आमन्ता. ताय बोधिया दुक्खं परिजानाति, समुदयं पजहति, निरोधं सच्छिकरोति, मग्गं भावेतीति? न हेवं वत्तब्बे…पे….
बोधिया बुद्धोति? आमन्ता. अनागताय बोधिया बुद्धोति? न हेवं वत्तब्बे…पे….
अनागताय बोधिया बुद्धोति? आमन्ता. ताय बोधिया बोधिकरणीयं करोतीति? न हेवं वत्तब्बे…पे….
ताय बोधिया बोधिकरणीयं करोतीति? आमन्ता. ताय बोधिया दुक्खं परिजानाति…पे… मग्गं भावेतीति? न हेवं वत्तब्बे…पे….
पच्चुप्पन्नाय बोधिया बुद्धो, ताय बोधिया बोधिकरणीयं करोतीति? आमन्ता. अतीताय बोधिया बुद्धो, ताय बोधिया बोधिकरणीयं करोतीति? न हेवं वत्तब्बे…पे….
पच्चुप्पन्नाय बोधिया बुद्धो, ताय बोधिया दुक्खं परिजानाति, समुदयं पजहति, निरोधं सच्छिकरोति, मग्गं भावेतीति? आमन्ता. अतीताय बोधिया बुद्धो, ताय बोधिया दुक्खं परिजानाति…पे… मग्गं भावेतीति? न हेवं वत्तब्बे…पे….
पच्चुप्पन्नाय बोधिया बुद्धो, ताय बोधिया बोधिकरणीयं करोतीति? आमन्ता. अनागताय बोधिया बुद्धो, ताय बोधिया बोधिकरणीयं करोतीति? न हेवं वत्तब्बे…पे….
पच्चुप्पन्नाय बोधिया बुद्धो, ताय बोधिया दुक्खं परिजानाति…पे… मग्गं भावेतीति? आमन्ता. अनागताय बोधिया बुद्धो, ताय बोधिया दुक्खं परिजानाति…पे… मग्गं भावेतीति? न हेवं वत्तब्बे…पे….
अतीताय बोधिया बुद्धो, न च ताय बोधिया बोधिकरणीयं करोतीति? आमन्ता. पच्चुप्पन्नाय बोधिया बुद्धो, न च ताय बोधिया बोधिकरणीयं करोतीति? न हेवं वत्तब्बे…पे….
अतीताय बोधिया बुद्धो, न च ताय बोधिया दुक्खं परिजानाति…पे… मग्गं भावेतीति? आमन्ता. पच्चुप्पन्नाय बोधिया बुद्धो, न च ताय बोधिया दुक्खं परिजानाति…पे… मग्गं भावेतीति? न हेवं वत्तब्बे…पे….
अनागताय बोधिया बुद्धो, न च ताय बोधिया बोधिकरणीयं करोतीति? आमन्ता. पच्चुप्पन्नाय बोधिया बुद्धो, न च ताय बोधिया बोधिकरणीयं करोतीति? न हेवं वत्तब्बे…पे….
अनागताय बोधिया बुद्धो, न च ताय बोधिया दुक्खं परिजानाति…पे… मग्गं भावेतीति? आमन्ता. पच्चुप्पन्नाय बोधिया बुद्धो, न च ताय बोधिया दुक्खं परिजानाति…पे… मग्गं भावेतीति? न हेवं वत्तब्बे…पे….
३९९. अतीताय बोधिया बुद्धो, अनागताय बोधिया बुद्धो, पच्चुप्पन्नाय बोधिया बुद्धोति? आमन्ता. तीहि बोधीहि बुद्धोति? न हेवं वत्तब्बे…पे….
तीहि बोधीहि बुद्धोति? आमन्ता. सततं समितं अब्बोकिण्णं तीहि बोधीहि समन्नागतो समोहितो, तिस्सो बोधियो पच्चुपट्ठिताति? न हेवं वत्तब्बे…पे….
न वत्तब्बं – ‘‘बोधिया बुद्धो’’ति? आमन्ता. ननु बोधिपटिलाभा बुद्धोति? आमन्ता. हञ्चि बोधिपटिलाभा बुद्धो, तेन वत रे वत्तब्बे – ‘‘बोधिया बुद्धो’’ति.
बोधिपटिलाभा बुद्धोति, बोधिया बुद्धोति? आमन्ता. बोधिपटिलाभा बोधीति? न हेवं वत्तब्बे…पे….
बोधिया बुद्धोतिकथा निट्ठिता.
४. चतुत्थवग्गो
(३९) ७. लक्खणकथा
४००. लक्खणसमन्नागतो बोधिसत्तोति? आमन्ता. पदेसलक्खणेहि समन्नागतो पदेसबोधिसत्तोति? न हेवं वत्तब्बे…पे….
लक्खणसमन्नागतो बोधिसत्तोति? आमन्ता. तिभागलक्खणेहि समन्नागतो तिभागबोधिसत्तोति? न हेवं वत्तब्बे…पे….
लक्खणसमन्नागतो बोधिसत्तोति? आमन्ता. उपड्ढलक्खणेहि समन्नागतो उपड्ढबोधिसत्तोति? न हेवं वत्तब्बे…पे….
लक्खणसमन्नागतो बोधिसत्तोति? आमन्ता. चक्कवत्तिसत्तो लक्खणसमन्नागतो, चक्कवत्तिसत्तो बोधिसत्तोति? न हेवं वत्तब्बे…पे….
चक्कवत्तिसत्तो लक्खणसमन्नागतो, चक्कवत्तिसत्तो बोधिसत्तोति? आमन्ता. यादिसो बोधिसत्तस्स पुब्बयोगो पुब्बचरिया धम्मक्खानं धम्मदेसना, तादिसो चक्कवत्तिसत्तस्स पुब्बयोगो पुब्बचरिया धम्मक्खानं धम्मदेसनाति? न हेवं वत्तब्बे…पे….
४०१. यथा बोधिसत्तस्स जायमानस्स देवा पठमं पटिग्गण्हन्ति पच्छा मनुस्सा [दी. नि. २.२७; म. नि. ३.२०५ वुत्तं दिस्साय पुच्छति], एवमेवं चक्कवत्तिसत्तस्स जायमानस्स देवा पठमं पटिग्गण्हन्ति पच्छा मनुस्साति? न हेवं वत्तब्बे…पे….
यथा बोधिसत्तस्स जायमानस्स चत्तारो नं देवपुत्ता पटिग्गहेत्वा मातु पुरतो ठपेन्ति – ‘‘अत्तमना, देवि, होहि! महेसक्खो ते पुत्तो उप्पन्नो’’ति, एवमेवं चक्कवत्तिसत्तस्स जायमानस्स चत्तारो नं देवपुत्ता पटिग्गहेत्वा मातु पुरतो ठपेन्ति – ‘‘अत्तमना, देवि, होहि! महेसक्खो ते पुत्तो उप्पन्नो’’ति? न हेवं वत्तब्बे…पे….
यथा बोधिसत्तस्स जायमानस्स द्वे उदकस्स धारा अन्तलिक्खा पातुभवन्ति – एका सीतस्स, एका उण्हस्स – येन बोधिसत्तस्स उदककिच्चं करोन्ति मातु च, एवमेवं चक्कवत्तिसत्तस्स जायमानस्स द्वे उदकस्स धारा अन्तलिक्खा पातुभवन्ति – एका सीतस्स, एका उण्हस्स – येन चक्कवत्तिसत्तस्स उदककिच्चं करोन्ति मातु चाति? न हेवं वत्तब्बे…पे….
यथा सम्पतिजातो बोधिसत्तो समेहि पादेहि पतिट्ठहित्वा उत्तरेन अभिमुखो सत्तपदवीतिहारेन गच्छति सेतम्हि छत्ते अनुधारियमाने, सब्बा च दिसा विलोकेति, आसभिञ्च वाचं भासति – ‘‘अग्गोहमस्मि लोकस्स, जेट्ठोहमस्मि लोकस्स, सेट्ठोहमस्मि लोकस्स, अयमन्तिमा जाति, नत्थि दानि पुनब्भवो’’ति, एवमेवं सम्पतिजातो चक्कवत्तिसत्तो समेहि पादेहि पतिट्ठहित्वा उत्तरेन अभिमुखो सत्तपदवीतिहारेन गच्छति सेतम्हि छत्ते अनुधारियमाने, सब्बा च दिसा विलोकेति, आसभिञ्च वाचं भासति – ‘‘अग्गोहमस्मि लोकस्स, जेट्ठोहमस्मि लोकस्स, सेट्ठोहमस्मि लोकस्स, अयमन्तिमा जाति, नत्थि दानि पुनब्भवो’’ति? न हेवं वत्तब्बे…पे….
यथा बोधिसत्तस्स जायमानस्स महतो आलोकस्स महतो ओभासस्स महतो भूमिचालस्स पातुभावो होति, एवमेवं चक्कवत्तिसत्तस्स जायमानस्स महतो आलोकस्स महतो ओभासस्स महतो भूमिचालस्स पातुभावो होतीति? न हेवं वत्तब्बे…पे….
यथा बोधिसत्तस्स पकतिकायो समन्ता ब्यामं ओभासति, एवमेवं चक्कवत्तिसत्तस्स पकतिकायो समन्ता ब्यामं ओभासतीति? न हेवं वत्तब्बे…पे….
यथा बोधिसत्तो महासुपिनं पस्सति, एवमेवं चक्कवत्तिसत्तो महासुपिनं पस्सतीति? न हेवं वत्तब्बे…पे….
४०२. न वत्तब्बं – ‘‘लक्खणसमन्नागतो बोधिसत्तो’’ति? आमन्ता. ननु वुत्तं भगवता – ‘‘द्वत्तिंसिमानि, भिक्खवे, महापुरिसस्स महापुरिसलक्खणानि, येहि समन्नागतस्स महापुरिसस्स द्वेव गतियो भवन्ति अनञ्ञा [न अञ्ञा (क.)]! सचे अगारं अज्झावसति, राजा होति चक्कवत्ती धम्मिको धम्मराजा चातुरन्तो विजितावी जनपदत्थावरियप्पत्तो सत्तरतनसमन्नागतो. तस्सिमानि सत्त रतनानि भवन्ति, सेय्यथिदं – चक्करतनं, हत्थिरतनं, अस्सरतनं, मणिरतनं, इत्थिरतनं, गहपतिरतनं, परिणायकरतनमेव सत्तमं. परोसहस्सं खो पनस्स पुत्ता भवन्ति सूरा वीरङ्गरूपा परसेनप्पमद्दना. सो इमं पथविं सागरपरियन्तं अदण्डेन असत्थेन धम्मेन अभिविजिय अज्झावसति. सचे खो पन अगारस्मा अनगारियं पब्बजति, अरहं होति सम्मासम्बुद्धो लोके विवट्टच्छदो’’ति [दी. नि. ३.२००]. अत्थेव सुत्तन्तोति? आमन्ता. तेन हि लक्खणसमन्नागतो बोधिसत्तोति.
लक्खणकथा निट्ठिता.
४. चतुत्थवग्गो
(४०) ८. नियामोक्कन्तिकथा
४०३. बोधिसत्तो कस्सपस्स भगवतो पावचने ओक्कन्तनियामो चरितब्रह्मचरियोति [म. नि. २.२८२ घटिकारसुत्तं निस्साय पुच्छति]? आमन्ता. बोधिसत्तो कस्सपस्स भगवतो सावकोति? न हेवं वत्तब्बे…पे….
बोधिसत्तो कस्सपस्स भगवतो सावकोति? आमन्ता. सावको हुत्वा बुद्धो होतीति? न हेवं वत्तब्बे…पे….
सावको हुत्वा बुद्धो होतीति? आमन्ता. अनुस्सवियोति? न हेवं वत्तब्बे…पे….
अनुस्सवियोति? आमन्ता. ननु भगवा सयम्भूति? आमन्ता. हञ्चि भगवा सयम्भू, नो च वत रे वत्तब्बे – ‘‘अनुस्सवियो’’ति.
बोधिसत्तो कस्सपस्स भगवतो पावचने ओक्कन्तनियामो चरितब्रह्मचरियोति? आमन्ता. भगवता बोधिया मूले तीणेव सामञ्ञफलानि अभिसम्बुद्धानीति? न हेवं वत्तब्बे…पे….
ननु भगवता बोधिया मूले चत्तारि सामञ्ञफलानि अभिसम्बुद्धानीति? आमन्ता. हञ्चि भगवता बोधिया मूले चत्तारि सामञ्ञफलानि अभिसम्बुद्धानि, नो च वत रे वत्तब्बे – ‘‘बोधिसत्तो कस्सपस्स भगवतो पावचने ओक्कन्तनियामो चरितब्रह्मचरियो’’ति.
४०४. बोधिसत्तो कस्सपस्स भगवतो पावचने ओक्कन्तनियामो चरितब्रह्मचरियोति? आमन्ता. बोधिसत्तो दुक्करकारियं अकासीति? आमन्ता. दस्सनसम्पन्नो पुग्गलो दुक्करकारियं करेय्याति? न हेवं वत्तब्बे…पे….
बोधिसत्तो अपरन्तपं [अमरं तपं (सं. नि. १.१३७)] अकासि, अञ्ञं सत्थारं उद्दिसीति? आमन्ता. दस्सनसम्पन्नो पुग्गलो अञ्ञं सत्थारं उद्दिसेय्याति? न हेवं वत्तब्बे…पे….
आयस्मा आनन्दो भगवतो पावचने ओक्कन्तनियामो चरितब्रह्मचरियो, आयस्मा आनन्दो भगवतो सावकोति? आमन्ता. बोधिसत्तो कस्सपस्स भगवतो पावचने ओक्कन्तनियामो चरितब्रह्मचरियो, बोधिसत्तो कस्सपस्स भगवतो सावकोति? न हेवं वत्तब्बे…पे….
चित्तो गहपति हत्थको आळवको भगवतो पावचने ओक्कन्तनियामो चरितब्रह्मचरियो, चित्तो गहपति हत्थको आळवको भगवतो सावकोति? आमन्ता. बोधिसत्तो कस्सपस्स भगवतो पावचने ओक्कन्तनियामो चरितब्रह्मचरियो, बोधिसत्तो कस्सपस्स भगवतो सावकोति? न हेवं वत्तब्बे…पे….
बोधिसत्तो कस्सपस्स भगवतो पावचने ओक्कन्तनियामो चरितब्रह्मचरियो, न च कस्सपस्स भगवतो सावकोति? आमन्ता. आयस्मा आनन्दो भगवतो पावचने ओक्कन्तनियामो चरितब्रह्मचरियो, न च भगवतो सावकोति? न हेवं वत्तब्बे…पे….
बोधिसत्तो कस्सपस्स भगवतो पावचने ओक्कन्तनियामो चरितब्रह्मचरियो, न च कस्सपस्स भगवतो सावकोति? आमन्ता. चित्तो गहपति हत्थको आळवको भगवतो पावचने ओक्कन्तनियामो चरितब्रह्मचरियो, न च भगवतो सावकोति? न हेवं वत्तब्बे…पे….
बोधिसत्तो कस्सपस्स भगवतो पावचने ओक्कन्तनियामो चरितब्रह्मचरियो, न च कस्सपस्स भगवतो सावकोति? आमन्ता. सावको जातिं वीतिवत्तो असावको होतीति? न हेवं वत्तब्बे…पे….
४०५. न वत्तब्बं – ‘‘बोधिसत्तो कस्सपस्स भगवतो पावचने ओक्कन्तनियामो चरितब्रह्मचरियो’’ति? आमन्ता. ननु वुत्तं भगवता – ‘‘कस्सपे अहं, आनन्द, भगवति ब्रह्मचरियं अचरिं आयतिं सम्बोधाया’’ति! अत्थेव सुत्तन्तोति? आमन्ता. तेन हि न वत्तब्बं – ‘‘बोधिसत्तो कस्सपस्स भगवतो पावचने ओक्कन्तनियामो चरितब्रह्मचरियो’’ति.
बोधिसत्तो कस्सपस्स भगवतो पावचने ओक्कन्तनियामो चरितब्रह्मचरियोति? आमन्ता. ननु वुत्तं भगवता –
‘‘सब्बाभिभू सब्बविदूहमस्मि,
सब्बेसु धम्मेसु अनुपलित्तो;
सब्बञ्जहो तण्हक्खये विमुत्तो,
सयं अभिञ्ञाय कमुद्दिसेय्यं.
‘‘न मे आचरियो अत्थि, सदिसो मे न विज्जति;
सदेवकस्मिं लोकस्मिं, नत्थि मे पटिपुग्गलो.
‘‘अहञ्हि अरहा लोके, अहं सत्था अनुत्तरो;
एकोम्हि सम्मासम्बुद्धो, सीतिभूतोस्मि निब्बुतो.
‘‘धम्मचक्कं पवत्तेतुं, गच्छामि कासिनं पुरं;
अन्धीभूतस्मिं [अन्धभूतस्मिं (सी. स्या. कं. पी.)] लोकस्मिं, आहञ्छं [आहञ्ञिं (क.)] अमतदुन्दुभि’’न्ति [दुद्रभिन्ति (क.)].
‘‘यथा खो त्वं, आवुसो, पटिजानासि, अरहसि अनन्तजिनो’’ति?
‘‘मादिसा वे जिना होन्ति, ये पत्ता आसवक्खयं;
जिता मे पापका धम्मा, तस्माहं उपक जिनो’’ति [महाव. ११; म. नि. १.२८५; २.३४१].
अत्थेव सुत्तन्तोति? आमन्ता. तेन हि न वत्तब्बं – ‘‘बोधिसत्तो कस्सपस्स भगवतो पावचने ओक्कन्तनियामो चरितब्रह्मचरियो’’ति.
बोधिसत्तो कस्सपस्स भगवतो पावचने ओक्कन्तनियामो चरितब्रह्मचरियोति? आमन्ता. ननु वुत्तं भगवता – ‘‘‘इदं दुक्खं अरियसच्च’न्ति मे, भिक्खवे, पुब्बे अननुस्सुतेसु धम्मेसु चक्खुं उदपादि, ञाणं उदपादि, पञ्ञा उदपादि, विज्जा उदपादि, आलोको उदपादि. ‘तं खो पनिदं दुक्खं अरियसच्चं परिञ्ञेय्य’न्ति मे, भिक्खवे…पे… परिञ्ञातन्ति मे, भिक्खवे, पुब्बे अननुस्सुतेसु धम्मेसु चक्खुं उदपादि…पे… आलोको उदपादि. ‘इदं दुक्खसमुदयं अरियसच्च’न्ति मे, भिक्खवे…पे… ‘तं खो पनिदं दुक्खसमुदयं [दुक्खसमुदयो (स्या. कं.)] अरियसच्चं पहातब्ब’न्ति मे, भिक्खवे…पे… पहीनन्ति मे, भिक्खवे…पे… ‘इदं दुक्खनिरोधं [दुक्खनिरोधो (स्या. कं.)] अरियसच्च’न्ति मे, भिक्खवे…पे… ‘तं खो पनिदं दुक्खनिरोधं अरियसच्चं सच्छिकातब्ब’न्ति मे, भिक्खवे…पे… सच्छिकतन्ति मे, भिक्खवे…पे… ‘इदं दुक्खनिरोधगामिनी पटिपदा अरियसच्च’न्ति मे, भिक्खवे…पे… ‘तं खो पनिदं दुक्खनिरोधगामिनी पटिपदा अरियसच्चं भावेतब्ब’न्ति मे, भिक्खवे…पे… भावितन्ति मे, भिक्खवे, पुब्बे अननुस्सुतेसु धम्मेसु चक्खुं उदपादि, ञाणं उदपादि, पञ्ञा उदपादि, विज्जा उदपादि, आलोको उदपादी’’ति [महाव. १५; सं. नि. ५.१०८१; पटि. म. २.३०]. अत्थेव सुत्तन्तोति? आमन्ता. तेन हि न वत्तब्बं – ‘‘बोधिसत्तो कस्सपस्स भगवतो पावचने ओक्कन्तनियामो चरितब्रह्मचरियो’’ति.