१२. दुतियमोरनिवापसुत्तं

१४५. ‘‘तीहि, भिक्खवे, धम्मेहि समन्नागतो भिक्खु अच्चन्तनिट्ठो होति अच्चन्तयोगक्खेमी अच्चन्तब्रह्मचारी अच्चन्तपरियोसानो सेट्ठो देवमनुस्सानं. कतमेहि तीहि? इद्धिपाटिहारियेन, आदेसनापाटिहारियेन, अनुसासनीपाटिहारियेन – इमेहि खो, भिक्खवे, तीहि धम्मेहि समन्नागतो भिक्खु अच्चन्तनिट्ठो होति अच्चन्तयोगक्खेमी अच्चन्तब्रह्मचारी अच्चन्तपरियोसानो सेट्ठो देवमनुस्सान’’न्ति. द्वादसमं.