११. पठममोरनिवापसुत्तं
१४४. एकं समयं भगवा राजगहे विहरति मोरनिवापे परिब्बाजकारामे. तत्र खो भगवा भिक्खू आमन्तेसि – ‘‘भिक्खवो’’ति. ‘‘भदन्ते’’ति ते भिक्खू भगवतो पच्चस्सोसुं. भगवा एतदवोच –
‘‘तीहि, भिक्खवे, धम्मेहि समन्नागतो भिक्खु अच्चन्तनिट्ठो होति अच्चन्तयोगक्खेमी अच्चन्तब्रह्मचारी अच्चन्तपरियोसानो सेट्ठो देवमनुस्सानं. कतमेहि तीहि? असेक्खेन सीलक्खन्धेन, असेक्खेन समाधिक्खन्धेन, असेक्खेन पञ्ञाक्खन्धेन. इमेहि खो, भिक्खवे, तीहि धम्मेहि समन्नागतो भिक्खु अच्चन्तनिट्ठो होति अच्चन्तयोगक्खेमी अच्चन्तब्रह्मचारी अच्चन्तपरियोसानो सेट्ठो देवमनुस्सान’’न्ति. एकादसमं.