९. पठमसिक्खत्तयसुत्तं
९०. ‘‘तिस्सो इमा, भिक्खवे, सिक्खा. कतमा तिस्सो? अधिसीलसिक्खा, अधिचित्तसिक्खा, अधिपञ्ञासिक्खा.
‘‘कतमा च, भिक्खवे, अधिसीलसिक्खा? इध, भिक्खवे, भिक्खु सीलवा होति…पे… समादाय सिक्खति सिक्खापदेसु. अयं वुच्चति, भिक्खवे, अधिसीलसिक्खा.
‘‘कतमा च, भिक्खवे, अधिचित्तसिक्खा? इध, भिक्खवे, भिक्खु विविच्चेव कामेहि…पे… चतुत्थं झानं उपसम्पज्ज विहरति. अयं वुच्चति, भिक्खवे, अधिचित्तसिक्खा.
‘‘कतमा च, भिक्खवे, अधिपञ्ञासिक्खा? इध, भिक्खवे, भिक्खु ‘इदं दुक्ख’न्ति यथाभूतं पजानाति…पे… ‘अयं दुक्खनिरोधगामिनी पटिपदा’ति यथाभूतं पजानाति. अयं वुच्चति, भिक्खवे, अधिपञ्ञासिक्खा. इमा खो, भिक्खवे, तिस्सो सिक्खा’’ति. नवमं.