८. दुतियसञ्चेतनिकसुत्तं

२१८. ‘‘नाहं, भिक्खवे, सञ्चेतनिकानं कम्मानं कतानं उपचितानं अप्पटिसंवेदित्वा ब्यन्तीभावं वदामि, तञ्च खो दिट्ठेव धम्मे उपपज्जे वा अपरे वा परियाये. न त्वेवाहं, भिक्खवे, सञ्चेतनिकानं कम्मानं कतानं उपचितानं अप्पटिसंवेदित्वा दुक्खस्सन्तकिरियं वदामि.

‘‘तत्र, भिक्खवे, तिविधा कायकम्मन्तसन्दोसब्यापत्ति अकुसलसञ्चेतनिका दुक्खुद्रया दुक्खविपाका होति; चतुब्बिधा वचीकम्मन्तसन्दोसब्यापत्ति अकुसलसञ्चेतनिका दुक्खुद्रया दुक्खविपाका होति; तिविधा मनोकम्मन्तसन्दोसब्यापत्ति अकुसलसञ्चेतनिका दुक्खुद्रया दुक्खविपाका होति.

‘‘कथञ्च, भिक्खवे, तिविधा कायकम्मन्तसन्दोसब्यापत्ति अकुसलसञ्चेतनिका दुक्खुद्रया दुक्खविपाका होति…पे… एवं खो, भिक्खवे, तिविधा कायकम्मन्तसन्दोसब्यापत्ति अकुसलसञ्चेतनिका दुक्खुद्रया दुक्खविपाका होति.

‘‘कथञ्च, भिक्खवे, चतुब्बिधा वचीकम्मन्तसन्दोसब्यापत्ति अकुसलसञ्चेतनिका दुक्खुद्रया दुक्खविपाका होति…पे… एवं खो, भिक्खवे, चतुब्बिधा वचीकम्मन्तसन्दोसब्यापत्ति अकुसलसञ्चेतनिका दुक्खुद्रया दुक्खविपाका होति.

‘‘कथञ्च, भिक्खवे, तिविधा मनोकम्मन्तसन्दोसब्यापत्ति अकुसलसञ्चेतनिका दुक्खुद्रया दुक्खविपाका होति…पे… एवं खो, भिक्खवे, तिविधा मनोकम्मन्तसन्दोसब्यापत्ति अकुसलसञ्चेतनिका दुक्खुद्रया दुक्खविपाका होति.

‘‘तिविध कायकम्मन्तसन्दोसब्यापत्ति अकुसलसञ्चेतनिकाहेतु वा, भिक्खवे, सत्ता कायस्स भेदा परं मरणा अपायं दुग्गतिं विनिपातं निरयं उपपज्जन्ति, चतुब्बिधवचीकम्मन्त…पे… तिविधमनोकम्मन्तसन्दोसब्यापत्ति अकुसलसञ्चेतनिकाहेतु वा, भिक्खवे, सत्ता कायस्स भेदा परं मरणा अपायं दुग्गतिं विनिपातं निरयं उपपज्जन्ति.

‘‘नाहं, भिक्खवे, सञ्चेतनिकानं कम्मानं कतानं उपचितानं अप्पटिसंवेदित्वा ब्यन्तीभावं वदामि, तञ्च खो दिट्ठेव धम्मे उपपज्जे वा अपरे वा परियाये. न त्वेवाहं, भिक्खवे, सञ्चेतनिकानं कम्मानं कतानं उपचितानं अप्पटिसंवेदित्वा दुक्खस्सन्तकिरियं वदामि.

‘‘तत्र खो, भिक्खवे, तिविधा कायकम्मन्तसम्पत्ति कुसलसञ्चेतनिका सुखुद्रया सुखविपाका होति; चतुब्बिधा वचीकम्मन्तसम्पत्ति कुसलसञ्चेतनिका सुखुद्रया सुखविपाका होति; तिविधा मनोकम्मन्तसम्पत्ति कुसलसञ्चेतनिका सुखुद्रया सुखविपाका होति.

‘‘कथञ्च, भिक्खवे, तिविधा कायकम्मन्तसम्पत्ति कुसलसञ्चेतनिका सुखुद्रया सुखविपाका होति…पे… एवं खो, भिक्खवे, तिविधा कायकम्मन्तसम्पत्ति कुसलसञ्चेतनिका सुखुद्रया सुखविपाका होति.

‘‘कथञ्च, भिक्खवे, चतुब्बिधा वचीकम्मन्तसम्पत्ति कुसलसञ्चेतनिका सुखुद्रया सुखविपाका होति…पे… एवं खो, भिक्खवे, चतुब्बिधा वचीकम्मन्तसम्पत्ति कुसलसञ्चेतनिका सुखुद्रया सुखविपाका होति.

‘‘कथञ्च, भिक्खवे, तिविधा मनोकम्मन्तसम्पत्ति कुसलसञ्चेतनिका सुखुद्रया सुखविपाका होति…पे… एवं खो, भिक्खवे, तिविधा मनोकम्मन्तसम्पत्ति कुसलसञ्चेतनिका सुखुद्रया सुखविपाका होति.

‘‘तिविधकायकम्मन्तसम्पत्तिकुसलसञ्चेतनिकाहेतु वा, भिक्खवे, सत्ता कायस्स भेदा परं मरणा सुगतिं सग्गं लोकं उपपज्जन्ति; चतुब्बिधवचीकम्मन्तसम्पत्ति…पे… तिविधमनोकम्मन्तसम्पत्तिकुसलसञ्चेतनिकाहेतु वा, भिक्खवे, सत्ता कायस्स भेदा परं मरणा सुगतिं सग्गं लोकं उपपज्जन्ति…पे…. [उपपज्जन्ति. (स्या. क.) तथा सति ‘‘नाहं भिक्खवे सञ्चेतनिकान’’ मिच्चादिना वुच्चमानवचनेन सह एकसुत्तन्ति गहेतब्बं. पेय्यालेन पन पुरिमसुत्ते विय निगमनं दस्सितं] अट्ठमं.