८. भिक्खुनोवादवग्गो

४५०. ‘‘कतिहि नु खो, भन्ते, अङ्गेहि समन्नागतस्स भिक्खुनो भिक्खुनिसङ्घेनेव कम्मं कातब्ब’’न्ति? ‘‘पञ्चहुपालि, अङ्गेहि समन्नागतस्स भिक्खुनो भिक्खुनिसङ्घेनेव कम्मं कातब्बं, अवन्दियो सो भिक्खु भिक्खुनिसङ्घेन. कतमेहि पञ्चहि? विवरित्वा कायं भिक्खुनीनं दस्सेति, ऊरुं दस्सेति, अङ्गजातं दस्सेति, उभो अंसकूटे दस्सेति, ओभासति, गिही सम्पयोजेति – इमेहि खो, उपालि, पञ्चहङ्गेहि समन्नागतस्स भिक्खुनो भिक्खुनिसङ्घेनेव कम्मं कातब्बं. अवन्दियो सो भिक्खु भिक्खुनिसङ्घेन.

‘‘अपरेहिपि, उपालि, पञ्चहङ्गेहि समन्नागतस्स भिक्खुनो भिक्खुनिसङ्घेनेव कम्मं कातब्बं, अवन्दियो सो भिक्खु भिक्खुनिसङ्घेन. कतमेहि पञ्चहि? भिक्खुनीनं अलाभाय परिसक्कति, भिक्खुनीनं अनत्थाय परिसक्कति, भिक्खुनीनं अवासाय परिसक्कति, भिक्खुनियो अक्कोसति परिभासति, भिक्खू भिक्खुनीहि भेदेति – इमेहि खो, उपालि, पञ्चहङ्गेहि समन्नागतस्स भिक्खुनो भिक्खुनिसङ्घेनेव कम्मं कातब्बं, अवन्दियो सो भिक्खु भिक्खुनिसङ्घेन.

‘‘अपरेहिपि, उपालि, पञ्चहङ्गेहि समन्नागतस्स भिक्खुनो भिक्खुनिसङ्घेनेव कम्मं कातब्बं, अवन्दियो सो भिक्खु भिक्खुनिसङ्घेन. कतमेहि पञ्चहि? भिक्खुनीनं अलाभाय परिसक्कति, भिक्खुनीनं अनत्थाय परिसक्कति, भिक्खुनीनं अवासाय परिसक्कति, भिक्खुनियो अक्कोसति परिभासति, भिक्खू भिक्खुनीहि सम्पयोजेति – इमेहि खो, उपालि, पञ्चहङ्गेहि समन्नागतस्स भिक्खुनो भिक्खुनिसङ्घेनेव कम्मं कातब्बं, अवन्दियो सो भिक्खु भिक्खुनिसङ्घेना’’ति.

४५१. ‘‘कतिहि नु खो, भन्ते, अङ्गेहि समन्नागताय भिक्खुनिया कम्मं कातब्ब’’न्ति? पञ्चहुपालि, अङ्गेहि समन्नागताय भिक्खुनिया कम्मं कातब्बं. कतमेहि पञ्चहि? विवरित्वा कायं भिक्खूनं दस्सेति, ऊरुं दस्सेति, अङ्गजातं दस्सेति, उभो अंसकूटे दस्सेति, ओभासति, गिही सम्पयोजेति – इमेहि खो, उपालि, पञ्चहङ्गेहि समन्नागताय भिक्खुनिया कम्मं कातब्बं.

‘‘अपरेहिपि, उपालि, पञ्चहङ्गेहि समन्नागताय भिक्खुनिया कम्मं कातब्बं. कतमेहि पञ्चहि? भिक्खूनं अलाभाय परिसक्कति, भिक्खूनं अनत्थाय परिसक्कति, भिक्खूनं अवासाय परिसक्कति, भिक्खू अक्कोसति परिभासति, भिक्खुनियो भिक्खूहि भेदेति – इमेहि खो, उपालि, पञ्चहङ्गेहि समन्नागताय भिक्खुनिया कम्मं कातब्बं.

‘‘अपरेहिपि, उपालि, पञ्चहङ्गेहि समन्नागताय भिक्खुनिया कम्मं कातब्बं. कतमेहि पञ्चहि? भिक्खूनं अलाभाय परिसक्कति, भिक्खूनं अनत्थाय परिसक्कति, भिक्खूनं अवासाय परिसक्कति, भिक्खू अक्कोसति परिभासति, भिक्खुनियो भिक्खूहि सम्पयोजेति – इमेहि खो, उपालि, पञ्चहङ्गेहि समन्नागताय भिक्खुनिया कम्मं कातब्ब’’न्ति.

४५२. ‘‘कतिहि नु खो, भन्ते, अङ्गेहि समन्नागतेन भिक्खुना भिक्खुनीनं ओवादो न ठपेतब्बो’’ति? ‘‘पञ्चहुपालि, अङ्गेहि समन्नागतेन भिक्खुना भिक्खुनीनं ओवादो न ठपेतब्बो. कतमेहि पञ्चहि? अलज्जी च होति, बालो च, अपकतत्तो च, चावनाधिप्पायो वत्ता होति, नो वुट्ठानाधिप्पायो – इमेहि खो, उपालि, पञ्चहङ्गेहि समन्नागतेन भिक्खुना भिक्खुनीनं ओवादो न ठपेतब्बो.

‘‘अपरेहिपि, उपालि, पञ्चहङ्गेहि समन्नागतेन भिक्खुना भिक्खुनीनं ओवादो न ठपेतब्बो. कतमेहि पञ्चहि? अपरिसुद्धकायसमाचारो होति, अपरिसुद्धवचीसमाचारो होति, अपरिसुद्धाजीवो होति, बालो होति, अब्यत्तो, न पटिबलो अनुयुञ्जियमानो अनुयोगं दातुं – इमेहि खो, उपालि, पञ्चहङ्गेहि समन्नागतेन भिक्खुना भिक्खुनीनं ओवादो न ठपेतब्बो.

‘‘अपरेहिपि, उपालि, पञ्चहङ्गेहि समन्नागतेन भिक्खुना भिक्खुनीनं ओवादो न ठपेतब्बो. कतमेहि पञ्चहि? कायिकेन अनाचारेन समन्नागतो होति, वाचसिकेन अनाचारेन समन्नागतो होति, कायिकवाचसिकेन अनाचारेन समन्नागतो होति, भिक्खुनीनं अक्कोसकपरिभासको होति, भिक्खुनीहि सद्धिं संसट्ठो विहरति अननुलोमिकेन संसग्गेन – इमेहि खो, उपालि, पञ्चहङ्गेहि समन्नागतेन भिक्खुना भिक्खुनीनं ओवादो न ठपेतब्बो.

‘‘अपरेहिपि, उपालि, पञ्चहङ्गेहि समन्नागतेन भिक्खुना भिक्खुनीनं ओवादो न ठपेतब्बो. कतमेहि पञ्चहि? अलज्जी च होति, बालो च, अपकतत्तो च, भण्डनकारको च होति कलहकारको, सिक्खाय च न परिपूरिकारी – इमेहि खो, उपालि, पञ्चहङ्गेहि समन्नागतेन भिक्खुना भिक्खुनीनं ओवादो न ठपेतब्बो’’ति.

४५३. ‘‘कतिहि नु खो, भन्ते, अङ्गेहि समन्नागतेन भिक्खुना भिक्खुनीनं ओवादो न गहेतब्बो’’ति? ‘‘पञ्चहुपालि, अङ्गेहि समन्नागतेन भिक्खुना भिक्खुनीनं ओवादो न गहेतब्बो. कतमेहि पञ्चहि? कायिकेन अनाचारेन समन्नागतो होति, वाचसिकेन अनाचारेन समन्नागतो होति, कायिकवाचसिकेन अनाचारेन समन्नागतो होति, भिक्खुनीनं अक्कोसकपरिभासको होति, भिक्खुनीहि सद्धिं संसट्ठो विहरति अननुलोमिकेन संसग्गेन – इमेहि खो, उपालि, पञ्चहङ्गेहि समन्नागतेन भिक्खुना भिक्खुनीनं ओवादो न गहेतब्बो.

‘‘अपरेहिपि, उपालि, पञ्चहङ्गेहि समन्नागतेन भिक्खुना भिक्खुनीनं ओवादो न गहेतब्बो. कतमेहि पञ्चहि? अलज्जी च होति, बालो च, अपकतत्तो च, गमिको वा होति, गिलानो वा – इमेहि खो, उपालि, पञ्चहङ्गेहि समन्नागतेन भिक्खुना भिक्खुनीनं ओवादो न गहेतब्बो’’ति.

४५४. ‘‘कतिहि नु खो, भन्ते, अङ्गेहि समन्नागतेन भिक्खुना सद्धिं न साकच्छितब्बो’’ति? ‘‘पञ्चहुपालि, अङ्गेहि समन्नागतेन भिक्खुना सद्धिं न साकच्छितब्बो. कतमेहि पञ्चहि? न असेक्खेन सीलक्खन्धेन समन्नागतो होति, न असेक्खेन समाधिक्खन्धेन समन्नागतो होति, न असेक्खेन पञ्ञाक्खन्धेन समन्नागतो होति, न असेक्खेन विमुत्तिक्खन्धेन समन्नागतो होति, न असेक्खेन विमुत्तिञाणदस्सनक्खन्धेन समन्नागतो होति – इमेहि खो, उपालि, पञ्चहङ्गेहि समन्नागतेन भिक्खुना सद्धिं न साकच्छितब्बो. पञ्चहुपालि, अङ्गेहि समन्नागतेन भिक्खुना सद्धिं साकच्छितब्बो. कतमेहि पञ्चहि? असेक्खेन सीलक्खन्धेन समन्नागतो होति, असेक्खेन समाधिक्खन्धेन समन्नागतो होति, असेक्खेन पञ्ञाक्खन्धेन समन्नागतो होति, असेक्खेन विमुत्तिक्खन्धेन समन्नागतो होति, असेक्खेन विमुत्तिञाणदस्सनक्खन्धेन समन्नागतो होति – इमेहि खो, उपालि, पञ्चहङ्गेहि समन्नागतेन भिक्खुना सद्धिं साकच्छितब्बो.

‘‘अपरेहिपि, उपालि, पञ्चहङ्गेहि समन्नागतेन भिक्खुना सद्धिं न साकच्छितब्बो. कतमेहि पञ्चहि? न अत्थपटिसम्भिदापत्तो होति, न धम्मपटिसम्भिदापत्तो होति, न निरुत्तिपटिसम्भिदापत्तो होति, न पटिभानपटिसम्भिदापत्तो होति, यथाविमुत्तं चित्तं न पच्चवेक्खिता – इमेहि खो, उपालि, पञ्चहङ्गेहि समन्नागतेन भिक्खुना सद्धिं न साकच्छितब्बो. पञ्चहुपालि, अङ्गेहि समन्नागतेन भिक्खुना सद्धिं साकच्छितब्बो. कतमेहि पञ्चहि? अत्थपटिसम्भिदापत्तो होति, धम्मपटिसम्भिदापत्तो होति, निरुत्तिपटिसम्भिदापत्तो होति, पटिभानपटिसम्भिदापत्तो होति, यथाविमुत्तं चित्तं पच्चवेक्खिता – इमेहि खो, उपालि, पञ्चहङ्गेहि समन्नागतेन भिक्खुना सद्धिं साकच्छितब्बो’’ति.

भिक्खुनोवादवग्गो निट्ठितो अट्ठमो.

तस्सुद्दानं –

भिक्खुनीहेव कातब्बं, अपरेहि तथा दुवे;

भिक्खुनीनं तयो कम्मा, न ठपेतब्बा द्वे दुका;

न गहेतब्बा द्वे वुत्ता, साकच्छासु च द्वे दुकाति.