४०. निस्सयमुच्चनककथा
१०३. अथ खो भगवा दक्खिणागिरिस्मिं यथाभिरन्तं विहरित्वा पुनदेव राजगहं पच्चागच्छि. अथ खो भगवा आयस्मन्तं आनन्दं आमन्तेसि – ‘‘किं नु खो, आनन्द, तथागतो ओगणेन भिक्खुसङ्घेन दक्खिणागिरिं चारिकं पक्कन्तो’’ति? अथ खो आयस्मा आनन्दो भगवतो एतमत्थं आरोचेसि. अथ खो भगवा एतस्मिं निदाने एतस्मिं पकरणे धम्मिं कथं कत्वा भिक्खू आमन्तेसि – ‘‘अनुजानामि, भिक्खवे, ब्यत्तेन भिक्खुना पटिबलेन पञ्चवस्सानि निस्साय वत्थुं, अब्यत्तेन यावजीवं.
‘‘पञ्चहि, भिक्खवे, अङ्गेहि समन्नागतेन भिक्खुना न अनिस्सितेन वत्थब्बं. न असेक्खेन सीलक्खन्धेन समन्नागतो होति न असेक्खेन समाधिक्खन्धेन, न असेक्खेन पञ्ञाक्खन्धेन न असेक्खेन विमुत्तिक्खन्धेन न असेक्खेन विमुत्तिञाणदस्सनक्खन्धेन समन्नागतो होति – इमेहि खो, भिक्खवे, पञ्चहङ्गेहि समन्नागतेन भिक्खुना न अनिस्सितेन वत्थब्बं.
‘‘पञ्चहि, भिक्खवे, अङ्गेहि समन्नागतेन भिक्खुना अनिस्सितेन वत्थब्बं. असेक्खेन सीलक्खन्धेन समन्नागतो होति असेक्खेन समाधिक्खन्धेन. असेक्खेन पञ्ञाक्खन्धेन… असेक्खेन विमुत्तिक्खन्धेन… असेक्खेन विमुत्तिञाणदस्सनक्खन्धेन समन्नागतो होति – इमेहि खो, भिक्खवे, पञ्चहङ्गेहि समन्नागतेन भिक्खुना अनिस्सितेन वत्थब्बं.
‘‘अपरेहिपि, भिक्खवे, पञ्चहङ्गेहि समन्नागतेन भिक्खुना न अनिस्सितेन वत्थब्बं. अस्सद्धो होति, अहिरिको होति, अनोत्तप्पी होति, कुसीतो होति, मुट्ठस्सति होति – इमेहि खो, भिक्खवे, पञ्चहङ्गेहि समन्नागतेन भिक्खुना न अनिस्सितेन वत्थब्बं.
‘‘पञ्चहि, भिक्खवे, अङ्गेहि समन्नागतेन भिक्खुना अनिस्सितेन वत्थब्बं. सद्धो होति, हिरिमा होति, ओत्तप्पी होति, आरद्धवीरियो होति, उपट्ठितस्सति होति – इमेहि खो, भिक्खवे, पञ्चहङ्गेहि समन्नागतेन भिक्खुना अनिस्सितेन वत्थब्बं.
‘‘अपरेहिपि, भिक्खवे, पञ्चहङ्गेहि समन्नागतेन भिक्खुना न अनिस्सितेन वत्थब्बं. अधिसीले सीलविपन्नो होति, अज्झाचारे आचारविपन्नो होति, अतिदिट्ठिया दिट्ठिविपन्नो होति, अप्पस्सुतो होति, दुप्पञ्ञो होति – इमेहि खो, भिक्खवे, पञ्चहङ्गेहि समन्नागतेन भिक्खुना न अनिस्सितेन वत्थब्बं.
‘‘पञ्चहि, भिक्खवे, अङ्गेहि समन्नागतेन भिक्खुना अनिस्सितेन वत्थब्बं. न अधिसीले सीलविपन्नो होति, न अज्झाचारे आचारविपन्नो होति, न अतिदिट्ठिया दिट्ठिविपन्नो होति, बहुस्सुतो होति, पञ्ञवा होति – इमेहि खो, भिक्खवे, पञ्चहङ्गेहि समन्नागतेन भिक्खुना अनिस्सितेन वत्थब्बं.
‘‘अपरेहिपि, भिक्खवे, पञ्चहङ्गेहि समन्नागतेन भिक्खुना न अनिस्सितेन वत्थब्बं. आपत्तिं न जानाति, अनापत्तिं न जानाति, लहुकं आपत्तिं न जानाति, गरुकं आपत्तिं न जानाति, उभयानि खो पनस्स पातिमोक्खानि वित्थारेन न स्वागतानि होन्ति न सुविभत्तानि न सुप्पवत्तीनि न सुविनिच्छितानि सुत्तसो अनुब्यञ्जनसो – इमेहि खो, भिक्खवे, पञ्चहङ्गेहि समन्नागतेन भिक्खुना न अनिस्सितेन वत्थब्बं.
‘‘पञ्चहि, भिक्खवे, अङ्गेहि समन्नागतेन भिक्खुना अनिस्सितेन वत्थब्बं. आपत्तिं जानाति, अनापत्तिं जानाति, लहुकं आपत्तिं जानाति, गरुकं आपत्तिं जानाति, उभयानि खो पनस्स पातिमोक्खानि वित्थारेन स्वागतानि होन्ति सुविभत्तानि सुप्पवत्तीनि सुविनिच्छितानि सुत्तसो अनुब्यञ्जनसो – इमेहि खो, भिक्खवे, पञ्चहङ्गेहि समन्नागतेन भिक्खुना अनिस्सितेन वत्थब्बं.
‘‘अपरेहिपि, भिक्खवे, पञ्चहङ्गेहि समन्नागतेन भिक्खुना न अनिस्सितेन वत्थब्बं. आपत्तिं न जानाति, अनापत्तिं न जानाति, लहुकं आपत्तिं न जानाति, गरुकं आपत्तिं न जानाति, ऊनपञ्चवस्सो होति – इमेहि खो, भिक्खवे, पञ्चहङ्गेहि समन्नागतेन भिक्खुना न अनिस्सितेन वत्थब्बं.
‘‘पञ्चहि, भिक्खवे, अङ्गेहि समन्नागतेन भिक्खुना अनिस्सितेन वत्थब्बं. आपत्तिं जानाति, अनापत्तिं जानाति, लहुकं आपत्तिं जानाति, गरुकं आपत्तिं जानाति, पञ्चवस्सो वा होति अतिरेक पञ्चवस्सो वा – इमेहि खो, भिक्खवे, पञ्चहङ्गेहि समन्नागतेन भिक्खुना अनिस्सितेन वत्थब्बं.
निस्सयमुच्चनककथा निट्ठिता.
पञ्चकदसवारो निट्ठितो.
१०४. ‘‘छहि, भिक्खवे, अङ्गेहि समन्नागतेन भिक्खुना न अनिस्सितेन वत्थब्बं. न असेक्खेन सीलक्खन्धेन समन्नागतो होति, न असेक्खेन समाधिक्खन्धेन, न असेक्खेन पञ्ञाक्खन्धेन, न असेक्खेन विमुत्तिक्खन्धेन, न असेक्खेन विमुत्तिञाणदस्सनक्खन्धेन समन्नागतो होति, ऊनपञ्चवस्सो होति – इमेहि खो, भिक्खवे, छहङ्गेहि समन्नागतेन भिक्खुना न अनिस्सितेन वत्थब्बं.
‘‘छहि, भिक्खवे, अङ्गेहि समन्नागतेन भिक्खुना अनिस्सितेन वत्थब्बं. असेक्खेन सीलक्खन्धेन समन्नागतो होति, असेक्खेन समाधिक्खन्धेन, असेक्खेन पञ्ञाक्खन्धेन, असेक्खेन विमुत्तिक्खन्धेन, असेक्खेन विमुत्तिञाणदस्सनक्खन्धेन समन्नागतो होति, पञ्चवस्सो वा होति अतिरेकपञ्चवस्सो वा – इमेहि खो, भिक्खवे, छहङ्गेहि समन्नागतेन भिक्खुना अनिस्सितेन वत्थब्बं.
‘‘अपरेहिपि, भिक्खवे, छहङ्गेहि समन्नागतेन भिक्खुना न अनिस्सितेन वत्थब्बं. अस्सद्धो होति, अहिरिको होति, अनोत्तप्पी होति, कुसीतो होति, मुट्ठस्सति होति, ऊनपञ्चवस्सो होति – इमेहि खो, भिक्खवे, छहङ्गेहि समन्नागतेन भिक्खुना न अनिस्सितेन वत्थब्बं.
‘‘छहि, भिक्खवे, अङ्गेहि समन्नागतेन भिक्खुना अनिस्सितेन वत्थब्बं. सद्धो होति, हिरिमा होति, ओत्तप्पी होति, आरद्धवीरियो होति, उपट्ठितस्सति होति, पञ्चवस्सो वा होति अतिरेकपञ्चवस्सो वा – इमेहि खो, भिक्खवे, छहङ्गेहि समन्नागतेन भिक्खुना अनिस्सितेन वत्थब्बं.
‘‘अपरेहिपि, भिक्खवे, छहङ्गेहि समन्नागतेन भिक्खुना न अनिस्सितेन वत्थब्बं. अधिसीले सीलविपन्नो होति, अज्झाचारे आचारविपन्नो होति, अतिदिट्ठिया दिट्ठिविपन्नो होति, अप्पस्सुतो होति, दुप्पञ्ञो होति, ऊनपञ्चवस्सो होति – इमेहि खो, भिक्खवे, छहङ्गेहि समन्नागतेन भिक्खुना न अनिस्सितेन वत्थब्बं.
‘‘छहि, भिक्खवे, अङ्गेहि समन्नागतेन भिक्खुना अनिस्सितेन वत्थब्बं. न अधिसीले सीलविपन्नो होति, न अज्झाचारे आचारविपन्नो होति, न अतिदिट्ठिया दिट्ठिविपन्नो होति, बहुस्सुतो होति, पञ्ञवा होति, पञ्चवस्सो वा होति अतिरेकपञ्चवस्सो वा – इमेहि खो, भिक्खवे, छहङ्गेहि समन्नागतेन भिक्खुना अनिस्सितेन वत्थब्बं.
‘‘अपरेहिपि, भिक्खवे, छहङ्गेहि समन्नागतेन भिक्खुना न अनिस्सितेन वत्थब्बं. आपत्तिं न जानाति, अनापत्तिं न जानाति, लहुकं आपत्तिं न जानाति, गरुकं आपत्तिं न जानाति, उभयानि खो पनस्स पातिमोक्खानि वित्थारेन न स्वागतानि होन्ति न सुविभत्तानि न सुप्पवत्तीनि न सुविनिच्छितानि सुत्तसो अनुब्यञ्जनसो, ऊनपञ्चवस्सो होति – इमेहि खो, भिक्खवे, छहङ्गेहि समन्नागतेन भिक्खुना न अनिस्सितेन वत्थब्बं.
‘‘छहि, भिक्खवे, अङ्गेहि समन्नागतेन भिक्खुना अनिस्सितेन वत्थब्बं. आपत्तिं जानाति, अनापत्तिं जानाति, लहुकं आपत्तिं जानाति, गरुकं आपत्तिं जानाति, उभयानि खो पनस्स पातिमोक्खानि वित्थारेन स्वागतानि होन्ति सुविभत्तानि सुप्पवत्तीनि सुविनिच्छितानि सुत्तसो अनुब्यञ्जनसो, पञ्चवस्सो वा होति अतिरेकपञ्चवस्सो वा – इमेहि खो, भिक्खवे, छहङ्गेहि समन्नागतेन भिक्खुना अनिस्सितेन वत्थब्ब’’न्ति.
अभयूवरभाणवारो निट्ठितो अट्ठमो.
अट्ठमभाणवारो.