३. मानत्तारहवत्तं

८८. तेन खो पन समयेन मानत्तारहा भिक्खू सादियन्ति पकतत्तानं भिक्खूनं अभिवादनं, पच्चुट्ठानं, अञ्जलिकम्मं, सामीचिकम्मं, आसनाभिहारं, सेय्याभिहारं, पादोदकं पादपीठं, पादकथलिकं, पत्तचीवरपटिग्गहणं, नहाने पिट्ठिपरिकम्मं. ये ते भिक्खू अप्पिच्छा …पे… ते उज्झायन्ति खिय्यन्ति विपाचेन्ति – ‘‘कथञ्हि नाम मानत्तारहा भिक्खू सादियिस्सन्ति पकतत्तानं भिक्खूनं अभिवादनं, पच्चुट्ठानं, अञ्जलिकम्मं, सामीचिकम्मं, आसनाभिहारं, सेय्याभिहारं, पादोदकं पादपीठं, पादकथलिकं, पत्तचीवरपटिग्गहणं, नहाने पिट्ठिपरिकम्म’’न्ति! अथ खो ते भिक्खू भगवतो एतमत्थं आरोचेसुं…पे… ‘‘सच्चं किर, भिक्खवे, मानत्तारहा भिक्खू सादियन्ति पकतत्तानं भिक्खूनं अभिवादनं, पच्चुट्ठानं…पे… नहाने पिट्ठिपरिकम्म’’न्ति? ‘‘सच्चं भगवा’’ति. विगरहि बुद्धो भगवा – ‘‘अननुच्छविकं…पे… कथञ्हि नाम, भिक्खवे, मानत्तारहा भिक्खू सादियिस्सन्ति पकतत्तानं भिक्खूनं अभिवादनं…पे… नहाने पिट्ठिपरिकम्मं! नेतं, भिक्खवे, अप्पसन्नानं वा पसादाय…पे… विगरहित्वा…पे… धम्मिं कथं कत्वा भिक्खू आमन्तेसि – ‘‘न, भिक्खवे, मानत्तारहेन भिक्खुना सादितब्बं पकतत्तानं भिक्खूनं अभिवादनं, पच्चुट्ठानं…पे… नहाने पिट्ठिपरिकम्मं. यो सादियेय्य, आपत्ति दुक्कटस्स. अनुजानामि, भिक्खवे, मानत्तारहानं भिक्खूनं मिथु यथावुड्ढं अभिवादनं, पच्चुट्ठानं…पे… नहाने पिट्ठिपरिकम्मं. अनुजानामि, भिक्खवे, मानत्तारहानं भिक्खूनं पञ्च यथावुड्ढं – उपोसथं, पवारणं, वस्सिकसाटिकं, ओणोजनं, भत्तं. तेन हि, भिक्खवे, मानत्तारहानं भिक्खूनं वत्तं पञ्ञापेस्सामि यथा मानत्तारहेहि भिक्खूहि वत्तितब्बं.

८९. ‘‘मानत्तारहेन, भिक्खवे, भिक्खुना सम्मा वत्तितब्बं. तत्रायं सम्मावत्तना –

न उपसम्पादेतब्बं…पे… (यथा मूलाय पटिकस्सना, तथा वित्थारेतब्बं.) न भिक्खूहि सम्पयोजेतब्बं.

‘‘न, भिक्खवे, मानत्तारहेन भिक्खुना पकतत्तस्स भिक्खुनो पुरतो गन्तब्बं, न पुरतो निसीदितब्बं. यो होति सङ्घस्स आसनपरियन्तो सेय्यापरियन्तो विहारपरियन्तो सो तस्स पदातब्बो. तेन च सो सादितब्बो.

‘‘न, भिक्खवे, मानत्तारहेन भिक्खुना पकतत्तेन भिक्खुना पुरेसमणेन वा पच्छासमणेन वा कुलानि उपसङ्कमितब्बानि, न आरञ्ञिकङ्गं समादातब्बं, न पिण्डपातिकङ्गं समादातब्बं, न च तप्पच्चया पिण्डपातो नीहरापेतब्बो – मा मं जानिंसूति.

‘‘न, भिक्खवे, मानत्तारहेन भिक्खुना सभिक्खुका आवासा अभिक्खुको आवासो गन्तब्बो, अञ्ञत्र पकतत्तेन, अञ्ञत्र अन्तराया.

‘‘न, भिक्खवे, मनत्तारहेन भिक्खुना सभिक्खुका आवासा अभिक्खुको अनावासो गन्तब्बो, अञ्ञत्र पकतत्तेन, अञ्ञत्र अन्तराया.

‘‘न, भिक्खवे, मानत्तारहेन भिक्खुना सभिक्खुका आवासा अभिक्खुको आवासो वा अनावासो वा गन्तब्बो, अञ्ञत्र पकतत्तेन, अञ्ञत्र अन्तराया.

‘‘न, भिक्खवे, मानत्तारहेन भिक्खुना सभिक्खुका अनावासा अभिक्खुको आवासो गन्तब्बो…पे… अभिक्खुको अनावासो गन्तब्बो…पे… अभिक्खुको आवासो वा अनावासो वा गन्तब्बो, अञ्ञत्र पकतत्तेन, अञ्ञत्र अन्तराया.

‘‘न, भिक्खवे, मानत्तारहेन भिक्खुना सभिक्खुका आवासा वा अनावासा वा अभिक्खुको आवासो गन्तब्बो…पे… अभिक्खुको अनावासो गन्तब्बो…पे… अभिक्खुको आवासो वा अनावासो वा गन्तब्बो, अञ्ञत्र पकतत्तेन, अञ्ञत्र अन्तराया.

‘‘न, भिक्खवे, मानत्तारहेन भिक्खुना सभिक्खुका आवासा सभिक्खुको आवासो गन्तब्बो…पे… सभिक्खुको अनावासो गन्तब्बो…पे… सभिक्खुको आवासो वा अनावासो वा गन्तब्बो, यत्थस्सु भिक्खू नानासंवासका, अञ्ञत्र पकतत्तेन, अञ्ञत्र अन्तराया.

‘‘न, भिक्खवे, मानत्तारहेन भिक्खुना सभिक्खुका अनावासा सभिक्खुको आवासो गन्तब्बो…पे… सभिक्खुको अनावासो गन्तब्बो …पे… सभिक्खुको आवासो वा अनावासो वा गन्तब्बो, यत्थस्सु भिक्खू नानासंवासका, अञ्ञत्र पकतत्तेन, अञ्ञत्र अन्तराया.

‘‘न, भिक्खवे, मानत्तारहेन भिक्खुना सभिक्खुका आवासा वा अनावासा वा सभिक्खुको आवासो गन्तब्बो…पे… सभिक्खुको अनावासो गन्तब्बो…पे… सभिक्खुको आवासो वा अनावासो वा गन्तब्बो, यत्थस्सु भिक्खू नानासंवासका, अञ्ञत्र पकतत्तेन, अञ्ञत्र अन्तराया.

‘‘गन्तब्बो, भिक्खवे, मानत्तारहेन भिक्खुना सभिक्खुका आवासा सभिक्खुको आवासो…पे… सभिक्खुको अनावासो…पे… सभिक्खुको आवासो वा अनावासो वा, यत्थस्सु भिक्खू समानसंवासका, यं जञ्ञा सक्कोमि अज्जेव गन्तुन्ति.

‘‘गन्तब्बो, भिक्खवे, मानत्तारहेन भिक्खुना सभिक्खुका अनावासा सभिक्खुको आवासो…पे… सभिक्खुको अनावासो…पे… सभिक्खुको आवासो वा अनावासो वा, यत्थस्सु भिक्खू समानसंवासका, यं जञ्ञा सक्कोमि अज्जेव गन्तुन्ति.

‘‘गन्तब्बो, भिक्खवे, मानत्तारहेन भिक्खुना सभिक्खुका आवासा वा अनावासा वा सभिक्खुको आवासो…पे… सभिक्खुको अनावासो…पे… सभिक्खुको आवासो वा अनावासो वा, यत्थस्सु भिक्खू समानसंवासका, यं जञ्ञा सक्कोमि अज्जेव गन्तुन्ति.

‘‘न, भिक्खवे, मानत्तारहेन भिक्खुना पकतत्तेन भिक्खुना सद्धिं एकच्छन्ने आवासे वत्थब्बं, न एकच्छन्ने अनावासे वत्थब्बं, न एकच्छन्ने आवासे वा अनावासे वा वत्थब्बं. पकतत्तं भिक्खुं दिस्वा आसना वुट्ठातब्बं. पकतत्तो भिक्खु आसनेन निमन्तेतब्बो. न पकतत्तेन भिक्खुना सद्धिं एकासने निसीदितब्बं, न नीचे आसने निसिन्ने उच्चे आसने निसीदितब्बं, न छमायं निसिन्ने आसने निसीदितब्बं; न एकचङ्कमे चङ्कमितब्बं, न नीचे चङ्कमे चङ्कमन्ते उच्चे चङ्कमे चङ्कमितब्बं, न छमायं चङ्कमन्ते चङ्कमे चङ्कमितब्बं.

‘‘न, भिक्खवे, मानत्तारहेन भिक्खुना पारिवासिकेन भिक्खुना सद्धिं…पे… मूलायपटिकस्सनारहेन भिक्खुना सद्धिं…पे… मानत्तारहेन वुड्ढतरेन भिक्खुना सद्धिं…पे… मानत्तचारिकेन भिक्खुना सद्धिं…पे… अब्भानारहेन भिक्खुना सद्धिं एकच्छन्ने आवासे वत्थब्बं, न एकच्छन्ने अनावासे वत्थब्बं, न एकच्छन्ने आवासे वा अनावासे वा वत्थब्बं; न एकासने निसीदितब्बं, न नीचे आसने निसिन्ने उच्चे आसने निसीदितब्बं, न छमायं निसिन्ने आसने निसीदितब्बं; न एकचङ्कमे चङ्कमितब्बं, न नीचे चङ्कमे चङ्कमन्ते उच्चे चङ्कमे चङ्कमितब्बं, न छमायं चङ्कमन्ते चङ्कमे चङ्कमितब्बं.

[महाव. ३९३] ‘‘मानत्तारहचतुत्थो चे, भिक्खवे, परिवासं ददेय्य, मूलाय पटिकस्सेय्य, मानत्तं ददेय्य, तंवीसो अब्भेय्य, अकम्मं, न च करणीय’’न्ति.

मानत्तारहवत्तं निट्ठितं.