७. बुद्धिसुत्तं
२१८. ‘‘सत्तिमे, भिक्खवे, बोज्झङ्गा भाविता बहुलीकता बुद्धिया अपरिहानाय संवत्तन्ति. कतमे सत्त? सतिसम्बोज्झङ्गो…पे… उपेक्खासम्बोज्झङ्गो. इमे खो, भिक्खवे, सत्त बोज्झङ्गा भाविता बहुलीकता बुद्धिया अपरिहानाय संवत्तन्ती’’ति. सत्तमं.
२१८. ‘‘सत्तिमे, भिक्खवे, बोज्झङ्गा भाविता बहुलीकता बुद्धिया अपरिहानाय संवत्तन्ति. कतमे सत्त? सतिसम्बोज्झङ्गो…पे… उपेक्खासम्बोज्झङ्गो. इमे खो, भिक्खवे, सत्त बोज्झङ्गा भाविता बहुलीकता बुद्धिया अपरिहानाय संवत्तन्ती’’ति. सत्तमं.