७. तण्हानिरोधसुत्तं
२०८. ‘‘यो, भिक्खवे, मग्गो या पटिपदा तण्हानिरोधाय संवत्तति, तं मग्गं तं पटिपदं भावेथ. कतमो च, भिक्खवे, मग्गो कतमा च पटिपदा तण्हानिरोधाय संवत्तति? यदिदं – सत्त बोज्झङ्गा. कतमे सत्त? सतिसम्बोज्झङ्गो…पे… उपेक्खासम्बोज्झङ्गो. कथं भाविता, च भिक्खवे, सत्त बोज्झङ्गा कथं बहुलीकता तण्हानिरोधाय संवत्तन्ति?
‘‘इध, भिक्खवे, भिक्खु सतिसम्बोज्झङ्गं भावेति विवेकनिस्सितं विरागनिस्सितं निरोधनिस्सितं वोस्सग्गपरिणामिं…पे… उपेक्खासम्बोज्झङ्गं भावेति विवेकनिस्सितं विरागनिस्सितं निरोधनिस्सितं वोस्सग्गपरिणामिं. एवं भाविता खो, भिक्खवे, सत्त बोज्झङ्गा एवं बहुलीकता तण्हानिरोधाय संवत्तन्ती’’ति. सत्तमं.