५. एकन्तदुक्खसुत्तं
११८. सावत्थियं विहरति…पे… ‘‘पथवीधातु चे [च (सी. स्या. कं.)] हिदं, भिक्खवे, एकन्तदुक्खा अभविस्स दुक्खानुपतिता दुक्खावक्कन्ता अनवक्कन्ता सुखेन, नयिदं सत्ता पथवीधातुया सारज्जेय्युं. यस्मा च खो, भिक्खवे, पथवीधातु सुखा सुखानुपतिता सुखावक्कन्ता अनवक्कन्ता दुक्खेन, तस्मा सत्ता पथवीधातुया सारज्जन्ति’’.
‘‘आपोधातु चे हिदं, भिक्खवे…पे… तेजोधातु चे हिदं, भिक्खवे… वायोधातु चे हिदं, भिक्खवे, एकन्तदुक्खा अभविस्स दुक्खानुपतिता दुक्खावक्कन्ता अनवक्कन्ता सुखेन, नयिदं सत्ता वायोधातुया सारज्जेय्युं. यस्मा च खो, भिक्खवे, वायोधातु सुखा सुखानुपतिता सुखावक्कन्ता अनवक्कन्ता दुक्खेन, तस्मा सत्ता वायोधातुया सारज्जन्ति.
‘‘पथवीधातु चे हिदं, भिक्खवे, एकन्तसुखा अभविस्स सुखानुपतिता सुखावक्कन्ता अनवक्कन्ता दुक्खेन, नयिदं सत्ता पथवीधातुया निब्बिन्देय्युं. यस्मा च खो, भिक्खवे, पथवीधातु दुक्खा दुक्खानुपतिता दुक्खावक्कन्ता अनवक्कन्ता सुखेन, तस्मा सत्ता पथवीधातुया निब्बिन्दन्ति.
‘‘आपोधातु चे हिदं, भिक्खवे…पे… तेजोधातु चे हिदं, भिक्खवे… वायोधातु चे हिदं, भिक्खवे, एकन्तसुखा अभविस्स सुखानुपतिता सुखावक्कन्ता अनवक्कन्ता दुक्खेन, नयिदं सत्ता वायोधातुया निब्बिन्देय्युं. यस्मा च खो, भिक्खवे, वायोधातु दुक्खा दुक्खानुपतिता दुक्खावक्कन्ता अनवक्कन्ता सुखेन, तस्मा सत्ता वायोधातुया निब्बिन्दन्ती’’ति. पञ्चमं.