५. चङ्कमसुत्तं
९९. एकं समयं भगवा राजगहे विहरति गिज्झकूटे पब्बते. तेन खो पन समयेन आयस्मा सारिपुत्तो सम्बहुलेहि भिक्खूहि सद्धिं भगवतो अविदूरे चङ्कमति; आयस्मापि खो महामोग्गल्लानो सम्बहुलेहि भिक्खूहि सद्धिं भगवतो अविदूरे चङ्कमति; आयस्मापि खो महाकस्सपो सम्बहुलेहि भिक्खूहि सद्धिं भगवतो अविदूरे चङ्कमति; आयस्मापि खो अनुरुद्धो सम्बहुलेहि भिक्खूहि सद्धिं भगवतो अविदूरे चङ्कमति; आयस्मापि खो पुण्णो मन्तानिपुत्तो सम्बहुलेहि भिक्खूहि सद्धिं भगवतो अविदूरे चङ्कमति; आयस्मापि खो उपालि सम्बहुलेहि भिक्खूहि सद्धिं भगवतो अविदूरे चङ्कमति; आयस्मापि खो आनन्दो सम्बहुलेहि भिक्खूहि सद्धिं भगवतो अविदूरे चङ्कमति; देवदत्तोपि खो सम्बहुलेहि भिक्खूहि सद्धिं भगवतो अविदूरे चङ्कमति.
अथ खो भगवा भिक्खू आमन्तेसि – ‘‘पस्सथ नो तुम्हे, भिक्खवे, सारिपुत्तं सम्बहुलेहि भिक्खूहि सद्धिं चङ्कमन्त’’न्ति? ‘‘एवं, भन्ते’’. ‘‘सब्बे खो एते, भिक्खवे, भिक्खू महापञ्ञा. पस्सथ नो तुम्हे, भिक्खवे, मोग्गल्लानं सम्बहुलेहि भिक्खूहि सद्धिं चङ्कमन्त’’न्ति? ‘‘एवं, भन्ते’’. ‘‘सब्बे खो एते, भिक्खवे, भिक्खू महिद्धिका. पस्सथ नो तुम्हे, भिक्खवे, कस्सपं सम्बहुलेहि भिक्खूहि सद्धिं चङ्कमन्त’’न्ति? ‘‘एवं, भन्ते’’. ‘‘सब्बे खो एते, भिक्खवे, भिक्खू धुतवादा. पस्सथ नो तुम्हे, भिक्खवे, अनुरुद्धं सम्बहुलेहि भिक्खूहि सद्धिं चङ्कमन्त’’न्ति? ‘‘एवं, भन्ते’’. ‘‘सब्बे खो एते, भिक्खवे, भिक्खू दिब्बचक्खुका. पस्सथ नो तुम्हे, भिक्खवे, पुण्णं मन्तानिपुत्तं सम्बहुलेहि भिक्खूहि सद्धिं चङ्कमन्त’’न्ति? ‘‘एवं, भन्ते’’. ‘‘सब्बे खो एते, भिक्खवे, भिक्खू धम्मकथिका. पस्सथ नो तुम्हे, भिक्खवे, उपालिं सम्बहुलेहि भिक्खूहि सद्धिं चङ्कमन्त’’न्ति? ‘‘एवं, भन्ते’’. ‘‘सब्बे खो एते, भिक्खवे, भिक्खू विनयधरा. पस्सथ नो तुम्हे, भिक्खवे, आनन्दं सम्बहुलेहि भिक्खूहि सद्धिं चङ्कमन्त’’न्ति? ‘‘एवं, भन्ते’’. ‘‘सब्बे खो एते, भिक्खवे, भिक्खू बहुस्सुता. पस्सथ नो तुम्हे, भिक्खवे, देवदत्तं सम्बहुलेहि भिक्खूहि सद्धिं चङ्कमन्त’’न्ति? ‘‘एवं, भन्ते’’. ‘‘सब्बे खो एते, भिक्खवे, भिक्खू पापिच्छा’’.
‘‘धातुसोव, भिक्खवे, सत्ता संसन्दन्ति समेन्ति. हीनाधिमुत्तिका हीनाधिमुत्तिकेहि सद्धिं संसन्दन्ति समेन्ति; कल्याणाधिमुत्तिका कल्याणाधिमुत्तिकेहि सद्धिं संसन्दन्ति समेन्ति. अतीतम्पि खो, भिक्खवे, अद्धानं धातुसोव सत्ता संसन्दिंसु समिंसु. हीनाधिमुत्तिका हीनाधिमुत्तिकेहि सद्धिं संसन्दिंसु समिंसु; कल्याणाधिमुत्तिका कल्याणाधिमुत्तिकेहि सद्धिं संसन्दिंसु समिंसु.
‘‘अनागतम्पि खो, भिक्खवे, अद्धानं धातुसोव सत्ता संसन्दिस्सन्ति समेस्सन्ति. हीनाधिमुत्तिका हीनाधिमुत्तिकेहि सद्धिं संसन्दिस्सन्ति समेस्सन्ति; कल्याणाधिमुत्तिका कल्याणाधिमुत्तिकेहि सद्धिं संसन्दिस्सन्ति समेस्सन्ति.
‘‘एतरहिपि खो, भिक्खवे, पच्चुप्पन्नं अद्धानं धातुसोव सत्ता संसन्दन्ति समेन्ति. हीनाधिमुत्तिका हीनाधिमुत्तिकेहि सद्धिं संसन्दन्ति समेन्ति; कल्याणाधिमुत्तिका कल्याणाधिमुत्तिकेहि सद्धिं संसन्दन्ति समेन्ती’’ति. पञ्चमं.