३. दुक्खलक्खणवत्थु
दुतियगाथायपि एवरूपमेव वत्थु. तदा हि भगवा तेसं भिक्खूनं दुक्खलक्खणे कताभियोगभावं ञत्वा, ‘‘भिक्खवे, सब्बेपि खन्धा पटिपीळनट्ठेन दुक्खा एवा’’ति वत्वा इमं गाथमाह –
२७८. ‘‘सब्बे सङ्खारा दुक्खाति, यदा पञ्ञाय पस्सति;
अथ निब्बिन्दति दुक्खे, एस मग्गो विसुद्धिया’’ति.
तत्थ दुक्खाति पटिपीळनट्ठेन दुक्खा. सेसं पुरिमसदिसमेव.
दुक्खलक्खणवत्थु ततियं.