४. लक्खणमातिकावण्णना
४. सभागो, विसभागोति अयं द्वीहि पदेहि निक्खित्ता लक्खणमातिका नाम. अयञ्हि सभागलक्खणेहि धम्मेहि सङ्गहनयो, विसभागलक्खणेहि असङ्गहनयो, तथा सम्पयोगविप्पयोगनयो योजेतब्बोति सभागविसभागलक्खणवसेन सङ्गहादिलक्खणं दस्सेतुं ठपितत्ता लक्खणमातिकाति वुच्चति.