अट्ठकथा › सुत्तपिटक (अट्ठकथा) › अङ्गुत्तरनिकाय (अट्ठकथा) › छक्कनिपात-अट्ठकथा › २. दुतियपण्णासकं › ७. देवतावग्गो८. बलसुत्तवण्णना७२. अट्ठमे बलतन्ति बलभावं थामभावं. असातच्चकारीति न सततकारी. सेसं हेट्ठा वुत्तनयमेव.९-१०. तज्झानसुत्तद्वयवण्णना →