४. चतुक्कमातिका

७५४. चतुब्बिधेन ञाणवत्थु –

(१) कम्मस्सकतञाणं, सच्चानुलोमिकं ञाणं, मग्गसमङ्गिस्स ञाणं, फलसमङ्गिस्स ञाणं

(२) दुक्खे ञाणं, दुक्खसमुदये ञाणं, दुक्खनिरोधे ञाणं, दुक्खनिरोधगामिनिया पटिपदाय ञाणं

(३) कामावचरा पञ्ञा, रूपावचरा पञ्ञा, अरूपावचरा पञ्ञा, अपरियापन्ना पञ्ञा

(४) धम्मे ञाणं, अन्वये ञाणं, परिये [परिच्चे (सब्बत्थ) पस्स दीघनिकाये] ञाणं, सम्मुतिञाणं [सम्मतिञाणं (स्या.) पस्स दीघनिकाये]

(५) अत्थि पञ्ञा आचयाय नो अपचयाय, अत्थि पञ्ञा अपचयाय नो आचयाय, अत्थि पञ्ञा आचयाय चेव अपचयाय च, अत्थि पञ्ञा नेवाचयाय नो अपचयाय

(६) अत्थि पञ्ञा निब्बिदाय नो पटिवेधाय, अत्थि पञ्ञा पटिवेधाय नो निब्बिदाय, अत्थि पञ्ञा निब्बिदाय चेव पटिवेधाय च, अत्थि पञ्ञा नेव निब्बिदाय नो पटिवेधाय

(७) हानभागिनी पञ्ञा, ठितिभागिनी पञ्ञा, विसेसभागिनी पञ्ञा, निब्बेधभागिनी पञ्ञा

(८) चतस्सो पटिसम्भिदा

(९) चतस्सो पटिपदा

(१०) चत्तारि आरम्मणानि

(११) जरामरणे ञाणं, जरामरणसमुदये ञाणं, जरामरणनिरोधे ञाणं, जरामरणनिरोधगामिनिया पटिपदाय ञाणं

(१२-२१) जातिया ञाणं…पे… भवे ञाणं…पे… उपादाने ञाणं…पे… तण्हाय ञाणं…पे… वेदनाय ञाणं…पे… फस्से ञाणं…पे… सळायतने ञाणं…पे… नामरूपे ञाणं…पे… विञ्ञाणे ञाणं…पे… सङ्खारेसु ञाणं, सङ्खारसमुदये ञाणं, सङ्खारनिरोधे ञाणं, सङ्खारनिरोधगामिनिया पटिपदाय ञाणं. एवं चतुब्बिधेन ञाणवत्थु.