१-६६. हेतुदुक-उपादादुकं

५६. हेतुं नोउपादा धम्मं पटिच्च हेतु नोउपादा धम्मो उप्पज्जति हेतुपच्चया. (संखित्तं.)

हेतुया नव…पे… अविगते नव. (संखित्तं. सब्बत्थ वित्थारो.)