७. पञ्हावारो

पच्चयचतुक्कं

हेतु-आरम्मणपच्चया

२७८. हेतु नेवदस्सनेन नभावनाय पहातब्बो धम्मो हेतुस्स नेवदस्सनेन नभावनाय पहातब्बस्स धम्मस्स हेतुपच्चयेन पच्चयो… तीणि.

हेतु नेवदस्सनेन नभावनाय पहातब्बो धम्मो हेतुस्स नेवदस्सनेन नभावनाय पहातब्बस्स धम्मस्स आरम्मणपच्चयेन पच्चयो… नव (संखित्तं).

२७९. हेतुया तीणि, आरम्मणे नव, अधिपतिया नव, अनन्तरे नव, समनन्तरे नव, सहजाते नव, अञ्ञमञ्ञे नव, निस्सये नव, उपनिस्सये नव, पुरेजाते तीणि, पच्छाजाते तीणि, आसेवने नव, कम्मे तीणि, विपाके नव, आहारे तीणि, इन्द्रिये नव, झाने तीणि, मग्गे नव, सम्पयुत्ते नव, विप्पयुत्ते पञ्च, अत्थिया नव, नत्थिया नव, विगते नव, अविगते नव.

पच्चनीयुद्धारो

२८०. हेतु नेवदस्सनेन नभावनाय पहातब्बो धम्मो हेतुस्स नेवदस्सनेन नभावनाय पहातब्बस्स धम्मस्स आरम्मणपच्चयेन पच्चयो… सहजातपच्चयेन पच्चयो… उपनिस्सयपच्चयेन पच्चयो (संखित्तं).

२८१. नहेतुया नव, नआरम्मणे नव (संखित्तं).

हेतुपच्चया नआरम्मणे तीणि (संखित्तं).

नहेतुपच्चया आरम्मणे नव (संखित्तं).

(यथा कुसलत्तिके पञ्हावारस्स अनुलोमम्पि पच्चनीयम्पि अनुलोमपच्चनीयम्पि पच्चनीयानुलोमम्पि नणितं, एवं गणेतब्बं.)

हेतुदुकदस्सनेनपहातब्बत्तिकं निट्ठितं.