१-६. पटिच्चवारादि

पच्चयचतुक्कं

हेतुपच्चयो

९४. हेतुं अदुक्खमसुखाय वेदनाय सम्पयुत्तं धम्मं पटिच्च हेतु अदुक्खमसुखाय वेदनाय सम्पयुत्तो धम्मो उप्पज्जति हेतुपच्चया… तीणि.

नहेतुं अदुक्खमसुखाय वेदनाय सम्पयुत्तं धम्मं पटिच्च नहेतु अदुक्खमसुखाय वेदनाय सम्पयुत्तो धम्मो उप्पज्जति हेतुपच्चया… तीणि.

हेतुं अदुक्खमसुखाय वेदनाय सम्पयुत्तञ्च नहेतुं अदुक्खमसुखाय वेदनाय सम्पयुत्तञ्च धम्मं पटिच्च हेतु अदुक्खमसुखाय वेदनाय सम्पयुत्तो धम्मो उप्पज्जति हेतुपच्चया… तीणि (संखित्तं).

९५. हेतुया नव, आरम्मणे नव, अधिपतिया नव, अनन्तरे नव, समनन्तरे नव, सहजाते नव, अञ्ञमञ्ञे नव, निस्सये नव, उपनिस्सये नव, पुरेजाते नव, आसेवने नव, कम्मे नव, विपाके नव, आहारे नव, इन्द्रिये नव, झाने नव, मग्गे नव, सम्पयुत्ते नव, विप्पयुत्ते नव, अत्थिया नव, नत्थिया नव, विगते नव, अविगते नव (अनुलोमं).

नहेतु-नअधिपतिपच्चया

९६. नहेतुं अदुक्खमसुखाय वेदनाय सम्पयुत्तं धम्मं पटिच्च नहेतु अदुक्खमसुखाय वेदनाय सम्पयुत्तो धम्मो उप्पज्जति नहेतुपच्चया… द्वे.

९७. हेतुं अदुक्खमसुखाय वेदनाय सम्पयुत्तं धम्मं पटिच्च हेतु अदुक्खमसुखाय वेदनाय सम्पयुत्तो धम्मो उप्पज्जति नअधिपतिपच्चया (संखित्तं).

९८. नहेतुया द्वे, नअधिपतिया नव, नपुरेजाते नव, नपच्छाजाते नव, नआसेवने नव, नकम्मे तीणि, नविपाके नव, नझाने एकं, नमग्गे एकं, नविप्पयुत्ते नव (संखित्तं, पच्चनीयं).

हेतुपच्चया नअधिपतिया नव (संखित्तं, अनुलोमपच्चनीयं).

नहेतुपच्चया आरम्मणे द्वे (संखित्तं, पच्चनीयानुलोमं).

(सहजातवारोपि पच्चयवारोपि निस्सयवारोपि संसट्ठवारोपि सम्पयुत्तवारोपि पटिच्चवारसदिसा वित्थारेतब्बा.)