७. पञ्हावारो
पच्चयचतुक्कं
हेतुपच्चयादि
३४२. हेतु असेक्खो धम्मो हेतुस्स असेक्खस्स धम्मस्स हेतुपच्चयेन पच्चयो… तीणि.
हेतु असेक्खो धम्मो हेतुस्स असेक्खस्स धम्मस्स अधिपतिपच्चयेन पच्चयो – सहजाताधिपति… तीणि.
नहेतु असेक्खो धम्मो नहेतुस्स असेक्खस्स धम्मस्स अधिपतिपच्चयेन पच्चयो – सहजाताधिपति… तीणि…पे….
हेतु असेक्खो धम्मो हेतुस्स असेक्खस्स धम्मस्स उपनिस्सयपच्चयेन पच्चयो – अनन्तरूपनिस्सयो (संखित्तं).
३४३. हेतुया तीणि, अधिपतिया छ, अनन्तरे नव, समनन्तरे नव, सहजाते नव, अञ्ञमञ्ञे नव, निस्सये नव, उपनिस्सये नव, कम्मे तीणि, विपाके नव, आहारे तीणि, इन्द्रिये नव, झाने तीणि, मग्गे नव, सम्पयुत्ते नव, अत्थिया नव, नत्थिया नव, विगते नव, अविगते नव.
पच्चनीयुद्धारो
३४४. हेतु असेक्खो धम्मो हेतुस्स असेक्खस्स धम्मस्स सहजातपच्चयेन पच्चयो… उपनिस्सयपच्चयेन पच्चयो (संखित्तं).
३४५. नहेतुया नव, नआरम्मणे नव (संखित्तं).
हेतुपच्चया नआरम्मणे तीणि (संखित्तं).
नहेतुपच्चया अधिपतिया तीणि (संखित्तं).
(यथा कुसलत्तिके पञ्हावारस्स अनुलोमम्पि पच्चनीयम्पि अनुलोमपच्चनीयम्पि पच्चनीयानुलोमम्पि नणितं, एवं गणेतब्बं.)