१. पच्चयानुलोमं

२. सङ्ख्यावारो

१०५. हेतुया नव, आरम्मणे नव, अधिपतिया नव…पे… उपनिस्सये नव, पुरेजाते छ, आसेवने छ, कम्मे नव, विपाके नव (सब्बत्थ नव), अविगते नव.