३. पच्चयानुलोमपच्चनीयं
हेतुदुकं
६४. हेतुपच्चया नआरम्मणे सत्त, नअधिपतिया सत्त, नअनन्तरे सत्त, नसमनन्तरे सत्त, नअञ्ञमञ्ञे सत्त, नउपनिस्सये सत्त, नपुरेजाते सत्त, नपच्छाजाते सत्त…पे… नसम्पयुत्ते सत्त, नविप्पयुत्ते एकं, नोनत्थिया सत्त, नोविगते सत्त.
हेतुसामञ्ञघटना
६५. हेतु-सहजात-निस्सय-अत्थि-अविगतन्ति नआरम्मणे सत्त…पे… नअनन्तरे सत्त, नसमनन्तरे सत्त, नअञ्ञमञ्ञे सत्त (इधापि संखित्तं), नसम्पयुत्ते सत्त, नविप्पयुत्ते एकं, नोनत्थिया सत्त, नोविगते सत्त.
हेतु -सहजात-अञ्ञमञ्ञ-निस्सय-अत्थि-अविगतन्ति नआरम्मणे एकं (सब्बत्थ एकं), नोविगते एकं (एवं गणेतब्बं).
अनुलोमपच्चनीयं.