५. ततियसत्तकसुत्तं
२५. ‘‘सत्त वो, भिक्खवे, अपरिहानिये धम्मे देसेस्सामि. तं सुणाथ, साधुकं मनसि करोथ…पे… कतमे च, भिक्खवे, सत्त अपरिहानिया धम्मा? यावकीवञ्च, भिक्खवे, भिक्खू सद्धा भविस्सन्ति; वुद्धियेव, भिक्खवे, भिक्खूनं पाटिकङ्खा, नो परिहानि.
‘‘यावकीवञ्च, भिक्खवे, भिक्खू हिरिमन्तो [हिरीमा (सी.), हिरिमना (दी. नि. २.१३८)] भविस्सन्ति…पे… ओत्तप्पिनो [ओत्तापीनो (सी.)] भविस्सन्ति… बहुस्सुता भविस्सन्ति… आरद्धवीरिया भविस्सन्ति… सतिमन्तो भविस्सन्ति… पञ्ञवन्तो भविस्सन्ति; वुद्धियेव, भिक्खवे, भिक्खूनं पाटिकङ्खा, नो परिहानि. ‘‘यावकीवञ्च, भिक्खवे, इमे सत्त अपरिहानिया धम्मा भिक्खूसु ठस्सन्ति, इमेसु च सत्तसु अपरिहानियेसु धम्मेसु भिक्खू सन्दिस्सिस्सन्ति; वुद्धियेव, भिक्खवे, भिक्खूनं पाटिकङ्खा, नो परिहानी’’ति. पञ्चमं.